बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद (Balod) जिले के अहिबरन नवागांव निवासी और सीआरपीएफ के पूर्व कोबरा कमांडो तोमन कुमार ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की पैरा तीरंदाज शीतल देवी के साथ कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा के फाइनल में इंडोनेशिया की थियोडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग की जोड़ी को 151-148 से हराया। यह प्रतियोगिता में भारत का तीरंदाजी का पहला स्वर्ण पदक रहा।
क्वालीफिकेशन में तोड़ा विश्व रिकॉर्ड
फाइनल से पहले भारतीय जोड़ी ने क्वालीफिकेशन राउंड में कुल 1402 अंक हासिल किए। इसमें शीतल ने 704 और तोमन ने 698 अंक बनाए। दोनों ने 1400 अंकों का पिछला विश्व रिकॉर्ड तोड़ा। फाइनल में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से बढ़त बनाए रखी और तीन अंकों के अंतर से मुकाबला अपने नाम किया।
नक्सली हमले में गंवाया था बायां पैर
तोमन कुमार वर्ष 2017 में सीआरपीएफ में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे। वर्ष 2021 में उन्होंने कोबरा बटालियन की ट्रेनिंग ली। फरवरी 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर गंभीर रूप से घायल हो गया था। इलाज के दौरान डॉक्टरों को उनका पैर काटना पड़ा।
हादसे के बाद उन्हें लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिवार और सीआरपीएफ के साथियों के सहयोग से उन्होंने दोबारा खेल की ओर कदम बढ़ाया। हैदराबाद के नेशनल सेंटर फॉर दिव्यांग एम्पावरमेंट में उनकी मुलाकात कोच पंकज सिंह से हुई। नवंबर 2023 में उन्होंने तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया।
दो साल में बने विश्व चैंपियन
सितंबर 2025 में दक्षिण कोरिया के ग्वांगजू में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में तोमन ने पुरुष कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। इसी प्रतियोगिता में उन्होंने मिक्स्ड टीम स्पर्धा में कांस्य पदक भी हासिल किया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर वह विश्व की नंबर एक रैंकिंग तक पहुंचे।
पैरों से तीर चलाती हैं शीतल देवी
जम्मू-कश्मीर की शीतल देवी जन्म से दोनों हाथों के बिना हैं। वह पैरों और शरीर की मदद से धनुष चलाती हैं। उन्होंने हांगझोउ एशियन पैरा गेम्स में दो स्वर्ण पदक और पेरिस पैरालंपिक 2024 में कांस्य पदक जीता था। उनकी गिनती देश की प्रमुख पैरा तीरंदाजों में होती है।
तोमन की इस उपलब्धि ने बालोद जिले और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेल मंच पर नई पहचान दी है।







