छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेज बने लूट का अड्डा, कमिश्नर को दी गई शिकायत

रायपुर। Chhattisgarh में निजी चिकित्सा महाविद्यालयों (Private Medical Colleges) द्वारा छात्रों से नियमों के विरुद्ध जाकर अतिरिक्त फीस वसूलने और शासन के आदेशों की अवहेलना करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति के स्पष्ट निर्देशों और शासन के आदेश के बावजूद छात्रों को उनकी रिफंड राशि न लौटाए जाने और वर्तमान सत्र में भी मनमानी फीस वसूलने के खिलाफ पुलिस कमिश्नर को एक गंभीर शिकायत सौंपी गई है।

शिकायतकर्ता निश्चय वाजपेयी की ओर से रायपुर पुलिस कमिश्नर को दिए गए इस आवेदन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कर कड़ी जांच करने की मांग की गई है। द लेंस ने भी कुछ महीने पहले इस सम्बन्ध में खबर दिखाई थी कि कैसे मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स से अतिरिक्त फीस वसूला जा रहा है।

क्या है पूरा मामला और आदेश?

राज्य शासन द्वारा गठित प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति ने गत 3 अप्रैल 2025 को एक संकल्प/निर्णय पारित किया था। इसके आधार पर छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 23 सितंबर 2025 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया था।

आदेश के अनुसार, सत्र 2022-23 से छात्रों से तय सीमा से अधिक वसूली गई फीस को वापस किया जाना था। रिपोर्ट में जिन प्रमुख संस्थानों का जिक्र किया गया है, उनके तहत प्रति विद्यार्थी निम्नलिखित राशि रिफंड की जानी थी:

  1. श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, जुनवानी (भिलाई, दुर्ग): प्रति विद्यार्थी ₹4,43,173/-
  2. रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, भनसोज (गोढ़ी, रायपुर): प्रति विद्यार्थी ₹4,53,593/-
  3. श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, मोवा (रायपुर): प्रति विद्यार्थी ₹4,58,222/-

शासकीय आदेश में यह प्रावधान था कि संबंधित महाविद्यालय एक महीने के भीतर छात्रों को यह राशि वापस करें। ऐसा न करने पर 7% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इसके अलावा, तीनों संस्थानों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने और आदेश का पालन न होने पर मान्यता निरस्त करने तक की कार्रवाई का उल्लेख था।

क्यों भड़का विवाद? शासन के आदेश के बाद भी मनमानी जारी

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सक्षम समिति के स्पष्ट आदेश और शासन की चेतावनी के बावजूद इन निजी मेडिकल कॉलेजों ने अब तक छात्रों को उनकी अतिरिक्त वसूली गई फीस वापस नहीं की है।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब यह बात सामने आई कि शैक्षणिक संस्थानों ने आदेशों की परवाह किए बिना **वर्तमान सत्र में भी छात्रों से निर्धारित वास्तविक व्यय से अधिक फीस वसूलना जारी रखा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह न केवल प्रशासनिक आदेशों की खुली अवहेलना है, बल्कि विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का सीधा आर्थिक और मानसिक शोषण है।

इन धाराओं के तहत FIR दर्ज करने की मांग

शिकायत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है:

धारा 308: जानबूझकर या लापरवाही से ऐसे हालात पैदा करना जिससे गंभीर प्रभाव पड़े।
धारा 318: धोखाधड़ी (छलपूर्वक भ्रामक विवरण या दबाव में धनराशि प्राप्त करना)।
धारा 316: आपराधिक न्यासभंग (सौंपे गए धन या विधिक रूप से देय राशि का बेईमानी से उपयोग/दुरुपयोग)।
धारा 223: लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करना।

शिकायतकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर पूरे मामले की निष्पक्ष विवेचना करने का अनुरोध किया है, ताकि उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों और कर्ज लेकर फीस चुकाने वाले अभिभावकों को न्याय मिल सके। पुलिस प्रशासन की ओर से अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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