नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई होगी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत 13 विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई करेगी। याचिका में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, फॉर्म 6 में बदलाव और SIR से जुड़े फैसलों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच जिन फैसलों या बिंदुओं पर असहमति रही है, उनका विस्तृत ब्यौरा अदालत के सामने पेश किया जाए।
फॉर्म 6 में बदलाव के फैसले पर होगी बात
याचिका में मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि फॉर्म 6 में बदलाव का फैसला किसने लिया था। इसके साथ ही इस फैसले से संबंधित बैठकों के मिनट्स और SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाए।
SIR के फैसलों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग
याचिका में SIR से संबंधित फैसलों की संवैधानिक वैधता की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि समिति के जरिए इन फैसलों का ऑडिट कराया जाना चाहिए।
इसके अलावा SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम और उनके नाम हटाने के कारण सार्वजनिक करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।
SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की अपील
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से SIR की मौजूदा प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। याचिका में संबंधित फैसलों और प्रक्रियाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध भी किया गया है।
अब गुरुवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच इस याचिका पर सुनवाई करेगी। इस दौरान चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, संबंधित रिकॉर्ड और विपक्षी नेताओं की ओर से उठाए गए संवैधानिक सवालों पर अदालत में बहस हो सकती है।
याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के अधिकारों, वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रोसेस और चुनाव आयोग के डिजिटल डेटाबेस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति बनाने की मांग भी की गई है।
इस याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग ने SIR लागू करते समय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया? क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना फैसले लिए?








