रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ और प्रशिक्षक कल्याण संघ (MITANIN STRIKE) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘गारंटी’ के तहत 2023 चुनावी घोषणा पत्र के वादों को पूरा करने और एनजीओ ठेका प्रथा बंद करने की मांग को लेकर 7 अगस्त 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरना प्रदर्शन शुरू किया है। इसमें 72,000 मितानिन, 3,250 मितानिन प्रशिक्षक, 280 हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर और 292 ब्लॉक कोऑर्डिनेटर शामिल हैं। संघ की तीन सूत्रीय मांगें हैं: मितानिन कार्यक्रम के सभी कार्यकर्ताओं का राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में संविलियन, वेतन में 50% वृद्धि, और एनएचएम स्वीकृत पदों पर एनजीओ ठेका प्रथा का अंत।
संघ का कहना है कि वे कभी काम से निकालने की बात नहीं कर रहे बल्कि एनएचएम स्वीकृत पदों पर स्थायी व्यवस्था चाहते हैं, जैसा अन्य राज्यों में आशा कार्यकर्ताओं के साथ हो रहा है। एनजीओ के जरिए अनियमित भर्तियां हो रही हैं, जिसमें स्वीकृत पदों से ज्यादा लोगों को रखा जा रहा है और वित्तीय अनियमितताएं हो रही हैं। संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्वास्थ्य मंत्री, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और एनएचएम एमडी को शिकायतें भेजी हैं और एनएचएम एमडी ने एनजीओ से स्पष्टीकरण मांगा है। 19 अगस्त को कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया, जिसमें 22 वर्षों से एनजीओ शोषण से मुक्ति की मांग की गई है।
प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर जल्द ही सभी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री निवास का घेराव करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री के बयान “किसी को काम से नहीं निकालूंगा, ठेका प्रथा बंद नहीं कर सकते” पर संघ ने स्पष्ट किया कि वे केवल एनएचएम स्वीकृत पदों पर तीन सूत्रीय मांग कर रहे हैं। यह हड़ताल मितानिन कार्यक्रम की पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं के अधिकारों के लिए एक बड़ा कदम है और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा रही है।