रायपुर। छत्तीसगढ़ मंत्रीमंडल में 14वें मंत्री के शपथ लेने का मामला अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंच गया है। हाई कोर्ट में सरकार के 14वें मंत्री के खिलाफ जनहित याचिका लगाई गई है। इसमें मुख्यमंत्री सहित सभी 14 मंत्रियों और राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग को पार्टी बनाया गया है।
हाई कोर्ट में यह याचिका लगी थी, जिसकी शुक्रवार को पहली सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता बसदेव चक्रवर्ती है, जिसने खुद के सामाजिक कार्यकर्ता होने का दावा किया है। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता से उसके समाज सेवा में किए गए कार्यों की जानकारी मांगी है।
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने इस मामले को सुना। उन्होंने राज्य सरकार से इस संबंध में दिशा निर्देश मांगे हैं। अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
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कांग्रेस ने खोला था 14वें मंत्री के खिलाफ मोर्चा
दरअसल, 20 अगस्त को 3 विधायकों गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत और राजेश अग्रवाल को राजभवन में राज्यपाल रमेन डेका ने मंत्री पद की शपथ दिलाई थी।
शपथ ग्रहण समारोह के कुछ ही देर बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 14वें मंत्री को अवैध बताया था। उन्होंने सवाल किया था कि क्या भारत सरकार से इसकी अनुमति का कोई पत्र आया है। अगर आया हो तो सार्वजनिक किया जाए।
भूपेश बघेल के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्यपाल रमेन डेका को पत्र लिखकर एक मंत्री हटाने की मांग की थी। नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा था कि अनुच्छेद 164 (1 क) के विपरीत चौदहवां मंत्री बनाया गया है। नियम विरुद्ध बने एक अतिरिक्त मंत्री को हटाया जाए।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और दो उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा को मिलाकर छत्तीसगढ़ कैबिनेट में अब 14 मंत्री हैं। पहली बार छत्तीसगढ़ में 14 मंत्री बनाए गए हैं।
इन तीनों के अलावा राम विचार नेता, दयाल दास बघेल, केदार कश्यप, ओपी चौधरी, लखन लाल देवांगन, श्याम बिहारी जायसवाल, टंक राम वर्मा, लक्ष्मी राजचाड़े, गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत और राजेश अग्रवाल कैबिनेट शामिल हैं।
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