नई दिल्ली। Cotton import duty: केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर शुल्क छूट की समयसीमा को 31 दिसंबर तक बढ़ाने का फैसला किया है। पहले यह समय सीमा 31 सितंबर तय की गई थी।
केंद्र सरकार के इस कदम को अमेरिका के 50 फ़ीसदी टैरिफ से जोड़कर देखा जा रहा है। क्योंकि अमेरिकी बाजार में भारत बड़े पैमाने पर गारमेंट्स निर्यात करता है।
आपको बता दें कि जब इंपोर्ट ड्यूटी खत्म होने की पहली खबर आई थी उसके अगले दिन ही कपास की कीमतों में 1100 रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी। अब इसे 3 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है।
सरकार का मानना है कि इससे भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) तथा निर्यात आधारित इकाइयों को नए ऑर्डर प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया कि आयात शुल्क में छूट से घरेलू कपास किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से किसानों के हितों की रक्षा की जाएगी।
भारतीय कपास निगम यह सुनिश्चित करता है कि किसानों को उनकी लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक मूल्य मिले। इसके अलावा, सरकार कपास की कीमतों पर सतत नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर त्वरित सुरक्षा उपाय लागू कर सकती है।
कपड़ा और परिधान उद्योग में लगभग 4.5 करोड़ लोग कार्यरत हैं। किफायती और स्थिर कपास आपूर्ति से न केवल लाखों नौकरियों को संरक्षण मिलेगा, बल्कि उद्योग के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय से धागा, कपड़ा, परिधान और होम टेक्सटाइल निर्माताओं के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा।
हटाए गए ये टैक्स
कपास के आयात पर कुल 11 प्रतिशत शुल्क लागू था, जिसमें 5 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क (बीसीडी), 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (एआईडीसी) इन दोनों पर 10 प्रतिशत सामाजिक कल्याण अधिभार शामिल था। सरकार ने अब इन सभी करों को हटा दिया है।