India weather update : भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और राजस्थान तक प्रकृति के प्रकोप ने कई लोगों की जान ले ली है जबकि कई लापता हैं। राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं लेकिन लगातार बारिश चुनौतियां बढ़ा रही है।
जम्मू-कश्मीर: भूस्खलन और बाढ़ का कहर
जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश ने तबाही मचाई है। रियासी जिले के बदर गांव में शनिवार सुबह हुए भूस्खलन में अब तक सात लोगों के शव बरामद किए गए हैं। मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिसके लिए बचाव अभियान जारी है। रामबन जिले के राजगढ़ में बादल फटने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोग लापता हैं। चिनाब नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण सलाल डैम के सभी गेट खोल दिए गए हैं। कटरा में वैष्णो देवी यात्रा पिछले पांच दिनों से बंद है क्योंकि 26 अगस्त को भूस्खलन में 34 लोगों की जान चली गई थी। राजौरी में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) भूस्खलन और पत्थर गिरने से बंद हो गया है, जिससे यातायात ठप है।
हिमाचल प्रदेश: बादल फटने और बाढ़ से नुकसान
हिमाचल प्रदेश में भी मौसम ने कहर बरपाया है। मंडी के गोहर में शुक्रवार देर रात बादल फटने से नांडी पंचायत में नसेंणी नाला उफान पर आ गया, जिससे कई वाहन बह गए। शिमला के जतोग कैंट में भूस्खलन के कारण सेना की आवासीय इमारतों को खाली कराया गया। मनाली में अचानक आई बाढ़ ने ओल्ड मनाली को जोड़ने वाली मुख्य सड़क को नुकसान पहुंचाया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है।
पंजाब: बाढ़ ने मचाई तबाही
पंजाब के आठ जिलों अमृतसर, पठानकोट, फिरोजपुर, गुरदासपुर, तरनतारन, फाजिल्का, कपूरथला और होशियारपुर में बाढ़ ने हालात बिगाड़ दिए हैं। 250 से ज्यादा गांवों में 5 से 15 फीट तक पानी भरा है। अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है और तीन लोग लापता हैं। सतलुज, रावी और घग्गर नदियों का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो गई है। फाजिल्का में सतलुज नदी के पुल पर पानी बह रहा है।
प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। सेना, एनडीआरएफ, और पंजाब पुलिस ने मिलकर 7,689 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। 20 हेलिकॉप्टर बचाव कार्य में लगे हैं। रेलवे ने 47 ट्रेनें रद्द कर दी हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है।
उत्तराखंड: बादल फटने से पांच की मौत
उत्तराखंड के चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर जिलों में शुक्रवार को बादल फटने की घटनाएं हुईं। इन हादसों में पांच लोगों की मौत हो गई और 11 लोग लापता हैं। बागेश्वर के कपकोट में कई घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। चमोली में भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ नेशनल हाईवे बंद हो गया, जिससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश: 18 जिले बाढ़ की चपेट में
उत्तर प्रदेश के 18 जिलों में बाढ़ ने तबाही मचाई है। बारिश और बाढ़ के कारण 774 मकान ढह चुके हैं। वाराणसी में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण सभी 84 घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी हैं।
दिल्ली: यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के करीब
दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर शनिवार सुबह 205.22 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान (205.33 मीटर) से थोड़ा ही नीचे है। हथिनी कुंड बैराज से 46,968 क्यूसेक और वजीराबाद बैराज से 44,970 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बाढ़ नियंत्रण विभाग ने हालात पर नजर रखी है और सभी एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है।
राजस्थान: बारिश और बिजली गिरने से नुकसान
राजस्थान में भी बारिश ने कहर बरपाया है। बीकानेर के लूणकरणसर में एक कच्चे मकान की छत गिरने से 10 साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि उसकी मां घायल है। टोंक में 425 साल पुराने किले की दीवार सरकारी स्कूल पर गिर गई। भीलवाड़ा में बिजली गिरने से एक मकान क्षतिग्रस्त हुआ और एक व्यक्ति घायल हो गया। उदयपुर, चित्तौड़गढ़, और जयपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक बारिश का अनुमान जताया है।
छत्तीसगढ़: बस्तर में बाढ़ से तबाही
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भारी बारिश के बाद बाढ़ ने 200 से ज्यादा मकान ढहा दिए। दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर में 2,196 लोग राहत शिविरों में शिफ्ट किए गए हैं। 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 15 से ज्यादा पुल-पुलिए टूट गए हैं। दंतेवाड़ा में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। बारसूर में स्टेट हाईवे 5 का पुल टूट गया, जिससे ग्रामीणों को सीढ़ियों के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है।
राहत और बचाव कार्य
देशभर में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं। प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। सूखा राशन, पीने का पानी और दवाइयां वितरित की जा रही हैं। हालांकि लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं।