सरकारी विभाग के खिलाफ चैंबर पहुंचा सीतारमण के दरवाजे
रायपुर। ‘मैडम छत्तीसगढ़ में व्यापारी जीएसटी अफसरों से त्रस्त हैं!अधिकारी,व्यापार– प्रतिष्ठानों में घुस कर मोबाइल छीनते हैं,कैमरा बंद करवा देते हैं,जिन प्रावधानों में हजार रुपए फाइन लगता है उनमें लाखों की वसूली की जा रही है,गाड़ियां रोक कर टैक्स वसूली की जा रही है,प्रावधानों का दुरुपयोग किया जा रहा है ..!!!’
ये मैडम कोई और नहीं बल्कि देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण थीं और छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर विभाग की शिकायतें करने वाले छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष सतीश थोरानी सहित बीजेपी के दो–दो पूर्व विधायक और कांग्रेस के नेता भी बतौर व्यापारी प्रतिनिधि शामिल थे।
मैडम यानी कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तुरंत छत्तीसगढ़ से पिछले एक साल के सर्वे और छापों का पूरा ब्यौरा मंगाने के निर्देश अपने अधिकारियों को दिए।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल एक व्यापारी प्रतिनिधि के मुताबिक वित्त मंत्री छत्तीसगढ़ की शिकायतें सुन कर अप्रसन्न ही नहीं हुईं बल्कि उन्होंने यहां तक कहा कि मुझे मालूम है कि कई राज्यों में किस तरह प्रावधानों का ‘blatantly दुरुपयोग’ किया जा रहा है!
प्रेक्षक कहते हैं कि ऐसा संभवतः पहली बार है कि छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने दिल्ली पहुंच कर राज्य सरकार या उसके एक विभाग के खिलाफ मोर्चा खोला है।
छत्तीसगढ़ में व्यापारियों के बीच सतीश थौरानी के नेतृत्व में हुई इस मुलाकात की बड़ी चर्चा है।
चर्चा इस बात की है कि जिस हौसले के साथ सतीश थौरानी के नेतृत्व में चैंबर ने राज्य सरकार के विभाग के खिलाफ व्यापारियों की शिकायतों को केंद्र सरकार तक पहुंचाया है यह पहले कभी नहीं हुआ।
बताते हैं कि इस मुलाकात में चैंबर के पूर्व अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी ने भी खुल कर कहा कि छत्तीसगढ़ में जीएसटी एक्ट की धारा 71 का दुरुपयोग किया जा रहा है।
सतीश थोरानी के नेतृत्व में इस 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की 28 अगस्त को ही दिल्ली में सुश्री सीतारमण से मुलाकात हुई। इस मुलाकात में शामिल एक व्यापारी नेता ने कहा कि यह प्रतिनिधिमंडल अपनी 22 सूत्री मांगों के सिलसिले में वित्त मंत्री से मिलने दिल्ली गया था।
उन्होंने ना केवल एक–एक प्रतिनिधि को ध्यान से सुना बल्कि उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया था।
बताते हैं कि इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल बीजेपी के पूर्व विधायक और चैंबर के पूर्व अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी ने व्यापारियों की दिक्कतों और सरकारी अफसरों के रवैए की खुल कर शिकायत की।
सबसे ज्यादा शिकायत इस बात को लेकर हुई कि विभाग के अधिकारी धारा 71 का खुला दुरुपयोग करते हैं और दबाव डाल कर व्यापारियों से टैक्स वसूली की जाती है। जीएसटी एक्ट की धारा 71 के तहत अधिकारियों को व्यापारियों के व्यवसाय स्थल पर पहुंच कर निरीक्षण करने और रिकॉर्ड्स की जांच करने का अधिकार प्राप्त है।
इस प्रतिनिधिमंडल ने धारा 71 के तहत होने वाली ऐसी जांचों के दौरान अधिकारियों के रवैया की तीखी शिकायतें की।उन्हें यह भी बताया कि राज्य की सीमा पर भी जांच के नाम पर व्यापारियों को परेशान किया जाता है।
पूरे राज्य के व्यापारी इस रवैए से त्रस्त हैं। छोटी–मोटी गलतियां ढूंढ कर व्यापारियों को धमका कर टैक्स की लंबी चौड़ी वसूली की जाती है।
एक नेता ने तो सीधे–सीधे इसके लिए प्रदेश सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यही तो इंस्पेक्टर राज है जिसका बीजेपी ही विरोध करती रही है !
बातचीत के दौरान मौजूद एक व्यापारी प्रतिनिधि ने कहा कि वित्त मंत्री इन शिकायतों को सुन कर बेहद अप्रसन्न हुईं और उन्होंने तुरंत ही अपने दफ्तर को निर्देशित किया कि छत्तीसगढ़ के वाणिज्य कर विभाग से पिछले एक साल के सर्वे और छापों के विवरण मंगवाए जाएं और इस बात की जांच की जाए कि क्या ये कार्रवाइयां व्यापारियों को परेशान करने के लिए की गईं?
सुश्री सीतारमण ने यह भी कहा कि उनके पास कई राज्यों से अफसरों के खिलाफ ऐसी शिकायतें पहुंची हैं कि अफसर blatantly यानी खुल्लम खुल्ला प्रावधानों का दुरुपयोग कर ऐसी कार्रवाइयां कर रहे हैं।
जानकार कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि छत्तीसगढ़ चैंबर के इस प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात, व्यापारियों की पहली शिकायत थी।
इससे पहले अलग–अलग जरियों से राज्य सरकार के उच्च स्तरों तक, प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी से लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक अफसरों के इस रवैए की शिकायतें पहुंचाई गईं लेकिन कोई असर हुआ नहीं।
चैंबर के सूत्र कहते हैं कि राज्य सरकार के उच्च पदस्थ लोगों का जवाब होता है कि इतनी कल्याणकारी योजनाएं हैं उसके लिए धनराशि कहां से आएगी ?
इधर वित्त मंत्री से मिलने के बाद छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स ने एक बयान जारी कर इस मुलाकात की विस्तृत जानकारी भी दी।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें जीएसटी प्रणाली को और अधिक व्यापारी-हितैषी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। ज्ञापन में विशेष रूप से छोटे और मध्यम व्यापारियों को होने वाली परेशानियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों की मांग की गई है।
चैंबर अध्यक्ष के बयान के मुताबिक बैठक के दौरान चैंबर के संरक्षक पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी ने धारा 71 के दुरुपयोग पर आपत्ति जताते हुए वित्त मंत्री को अवगत कराया कि धारा 71 के अंतर्गत व्यापारियों को अनावश्यक दबाव एवं ज़बरदस्ती की स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
कार्यकारी अध्यक्ष राजेश वासवानी ने बताया कि बैठक में चैंबर की ओर से निम्न प्रमुख मांगें रखी गईं:-
- अपील दायर करने की समय-सीमा को बढ़ाया जाए।
- नोटिस व्यापारियों को वॉट्सएप के माध्यम से भी भेजे जाएँ, ताकि समय पर जानकारी उपलब्ध हो सके।
- ई-वे बिल में छोटी तकनीकी त्रुटियों पर भारी-भरकम दंड न लगाया जाए।
- ITC ब्लॉकिंग एवं बैंक लियन की प्रक्रिया से पूर्व व्यापारी से समुचित संवाद किया
जाए तथा नोटिस देकर स्पष्टिकरण का अवसर दिया जाए। - सीमेंट में 28 से 18% गुलाल 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की जाए।
प्लाईवुड में 5%, मोबाइल और टीवी में 5%, गोल्ड में 1%, छोटी गाड़िया, फ्रिज एवं एसी में 18%, रेडीमेड में 1000 से ऊपर मूल्य वाले वस्तुओं पर 5%, एवं खाद्य पदार्थ को जीएसटी कर से मुक्त रखा जाए।
चेंबर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने बताया कि वित्त मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और चेंबर द्वारा प्रस्तुत किए गए सुझावों की सराहना की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार व्यापारियों के हितों का ध्यान रखेगी और जीएसटी प्रणाली को सरल बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
इस प्रतिनिधिमंडल में चेंबर संरक्षक श्रीचंद सुंदरानी, प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी, कोषाध्यक्ष निकेश बरडिया, सलाहकार लाभचंद बाफना, वाइस चेयरमेन चेतन तारवानी, कार्यकारी अध्यक्ष राधाकिशन सुंदरानी, राजेश वासवानी, ललित जयसिंघ, जसप्रीत सिंह सलूजा, सीए रवि ग्वालानी, सीए विकास शामिल थे।