नई दिल्ली। यह खबर चौंकाने वाली मगर सच है। इंडियन स्पेस रिसर्च सेंटर से बड़ी संख्या के वैज्ञानिकों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफों की संख्या इतनी ज्यादा है कि भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने ISRO के प्रमुख केंद्रों को नया निर्देश जारी किया है।
इसमें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफों के नियमों को सख्त कर दिया गया है, क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों के बाहर जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि 2012 से 2024के बीच 700 से ज्यादा लोगों ने इसरो से इस्तीफा दिया है।
सरकार ने लगाई रोक
14 जुलाई को जारी इस मेमोरेंडम में यूआर राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर , तिरुवनंतपुरम जैसे केंद्रों को निर्देश दिया गया है कि गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े ग्रुप ‘A’ के वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफा या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोधों को रूटीन आधार पर स्वीकार न करें।
इस्तीफों की बाढ़ से योजनाओं पर प्रभाव
निर्देश में कहा गया है कि हाल ही में ISRO के ग्रुप ‘A’ वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफों के अनुरोधों की बाढ़ आ गई है, जिससे राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।इसलिए फैसला लिया गया है कि गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों और परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के ऐसे अनुरोधों को रूटीन आधार पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार के नये नियम में क्या है
अब इस्तीफों के ऐसे अनुरोध प्राप्त होने पर उन्हें संबंधित केंद्र के डायरेक्टर की स्पष्ट सिफारिशों के साथ अंतरिक्ष विभाग को भेजा जाएगा, जहां अंतिम फैसला लिया जाएगा।यह आदेश 2020 में किए गए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव को पलटता है। उस समय केंद्र निदेशकों और प्रमुखों को ग्रुप A के वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे स्वीकार करने की अनुमति दी गई थी।
इस निर्देश के दायरे में सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC), लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (SAC), नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC), ISRO टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC) और मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (MCF) जैसे अन्य प्रमुख केंद्र भी शामिल हैं।
ISRO के लिए नुकसान, स्टार्टअप्स के लिए फायदा?
हाल ही में 100 से ज्यादा कर्मचारी ISRO छोड़ चुके हैं। सबसे ज्यादा छंटनी URSC बेंगलुरु और VSSC तिरुवनंतपुरम में हुई।इनमें से एक वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं, जो VSSC में जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल Mk III प्रोजेक्ट के डायरेक्टर थे। वे फरवरी में इस्तीफा देकर चले गए। LVM3 वही लॉन्च व्हीकल है जिसका इस्तेमाल गगनयान मिशन में होगा।कई वैज्ञानिक अंतरिक्ष स्टार्टअप्स में शामिल हो गए हैं।
2020 में केंद्र द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने और 2023 में भारतीय अंतरिक्ष नीति लाने के बाद स्टार्टअप्स तेजी से बढ़े हैं।भारत में फिलहाल 400 से ज्यादा रजिस्टर्ड स्पेस स्टार्टअप्स हैं, जिन्होंने कुल $500 मिलियन का निवेश आकर्षित किया है।
इसरो की परियोजनाओं को लग रहे झटके
इस्तीफों के अलावा ISRO को अपने मिशनों में भी बड़े झटके लगे हैं। ISRO का “वर्कहॉर्स” PSLV एक साल के अंदर दो बार फेल हो गया। जनवरी में PSLV-C62 तीसरे चरण के अंत में गड़बड़ी के कारण रास्ते से भटक गया। पिछले साल मई में PSLV-C61/EOS-09 (RISAT-1B) तीसरे चरण में चैंबर प्रेशर अचानक गिरने से फेल हो गया।
इसके बावजूद ISRO इन झटकों से उबरते हुए आने वाले प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रहा है, जिनमें गगनयान (भारत को स्वतंत्र रूप से मानव अंतरिक्ष उड़ान करने वाला चौथा देश बनाने का मिशन), चंद्रयान-4 (चंद्रमा से सैंपल वापस लाने वाला मिशन), भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और मंगलयान-2 शामिल हैं।










