US-Iran War : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को एक नया कूटनीतिक प्रस्ताव भेजा है। तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए फिर से खोलने को तैयार है लेकिन इसके बदले अमेरिका से अपनी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी और आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहा है। ईरान के इस प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम पर अभी चर्चा टालने की शर्त रखी गई है जिसे अमेरिकी प्रशासन ने स्वीकार नहीं किया है।
प्रस्ताव की मुख्य बातें
ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका उसके बंदरगाहों से नाकेबंदी हटा लेता है और प्रतिबंधों में छूट देता है तो वह होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल देगा। यह रास्ता दुनिया के तेल निर्यात का बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए इसकी सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, प्रस्ताव में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को फिलहाल अलग रखने की बात कही है। तेहरान चाहता है कि पहले युद्धविराम और होर्मुज संबंधी मुद्दे सुलझ जाएं, परमाणु मुद्दे पर बाद में बात हो।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताई है। उन्होंने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ बैठक में कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हल किए बिना कोई भी समझौता अधूरा रहेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया, “ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं किसी भी वार्ता का केंद्र हैं। हम होर्मुज की सुरक्षा के बदले परमाणु खतरे को नजरअंदाज नहीं कर सकते।”अमेरिका की मुख्य मांग है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम लंबे समय (करीब 20 साल) के लिए रोक दे और अपने पास मौजूद समृद्ध यूरेनियम (लगभग 440 किलो) अमेरिका को सौंप दे। ईरान इस शर्त को अभी मानने को तैयार नहीं दिख रहा।
बातचीत का माध्यम
दोनों देशों के बीच यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से हो रहा है। ईरान ने पाकिस्तान समेत कुछ अन्य देशों के जरिए अमेरिका तक अपना नया फॉर्मूला पहुंचाया है, लेकिन अब तक परमाणु मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई है।ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान मुख्य मुद्दे (परमाणु कार्यक्रम) से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है और शर्तों के जरिए दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।
क्यों है होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण ?
होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल का प्रमुख रास्ता है। अगर यहां जहाजरानी प्रभावित होती है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और व्यापार पर असर पड़ सकता है। दोनों पक्ष इस इलाके में नाकेबंदी जैसे कदम उठा चुके हैं जिससे तनाव और बढ़ा है।
वर्तमान स्थिति
अभी दोनों तरफ से प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर गहरी असहमति बनी हुई है। अमेरिका का रुख साफ है कि सुरक्षा और परमाणु खतरे को प्राथमिकता दी जाएगी, न कि सिर्फ आर्थिक छूट पर समझौता किया जाएगा। यह घटनाक्रम मिडिल ईस्ट में शांति की कोशिशों को नई दिशा दे सकता है लेकिन दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी अभी बड़ी चुनौती बनी हुई है। आगे की बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं।










