नौ सौ साल पहले सलाउद्दीन अय्यूबी ने जिस ब्यूफोर्ट किले पर किया था कब्जा, अब उस पर फिर से इजराइल का राज

Beaufort

लेंस डेस्क। दक्षिणी लेबनान में इजराइल ने अपना सैन्य अभियान तेज करते हुए सीज फायर के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और करीब 900 साल पुराने ब्यूफोर्ट किले (Beaufort) पर कब्जा कर लिया है। इजराइली सेना द्वारा जारी तस्वीरों और वीडियो में किले की ऊंची पहाड़ी पर इजराइल और गोलानी ब्रिगेड के झंडे लहराते दिखाई दिए। विश्लेषकों का मानना है कि यह पिछले 26 वर्षों में लेबनान के भीतर इजराइल की सबसे बड़ी जमीनी घुसपैठ मानी जा रही है।

ब्यूफोर्ट किले का निर्माण 12वीं सदी में क्रूसेडर सैनिकों ने किया था। 1190 में मुस्लिम शासक सलाउद्दीन अय्यूबी ने इस पर कब्जा कर लिया था। आधुनिक दौर में भी यह किला कई संघर्षों का केंद्र रहा है। 1982 में लेबनान युद्ध के दौरान इजराइल ने इस पर कब्जा कर लिया था और वर्ष 2000 में दक्षिणी लेबनान से सेना हटाने के बाद इसे वापस छोड़ दिया था।

इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने दावा किया कि सेना ने कई दिनों तक चले जमीनी संघर्ष और हवाई हमलों के बाद ब्यूफोर्ट किले और आसपास की पहाड़ियों पर नियंत्रण स्थापित किया। यह किला दक्षिणी लेबनान के नबातियेह क्षेत्र में 700 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और यहां से लेबनान तथा उत्तरी इजराइल के बड़े हिस्से पर नजर रखी जा सकती है।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को उत्तरी सीमा पर तैनात सैनिकों से मुलाकात के दौरान कहा कि सेना को लेबनान में अपने जमीनी अभियान का दायरा और बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि इजराइल उन इलाकों पर अपनी पकड़ मजबूत करेगा जो पहले हिजबुल्लाह के प्रभाव वाले क्षेत्र माने जाते थे।

इजराइली सेना लितानी नदी पार कर दक्षिणी लेबनान के अंदर तक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही लितानी और जहरानी नदी के बीच के क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र घोषित कर कई कस्बों के निवासियों को वहां से निकलने की चेतावनी दी गई है।

क्षेत्रीय तनाव और गहराने के आसार

ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा और लेबनान के भीतर इजराइली सैन्य अभियान के विस्तार ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है। ऐसे समय में जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेबनान मोर्चे पर बढ़ती सैन्य गतिविधियां पूरे क्षेत्र को एक बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकती हैं।

इजराइल और लेबनान के बीच 17 अप्रैल को संघर्ष विराम की घोषणा हुई थी, लेकिन उसके बाद भी सैन्य कार्रवाई जारी है। क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इजराइल किसी संभावित अमेरिका-ईरान समझौते से पहले हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता को अधिकतम नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव भी बढ़ा

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी कम होने के संकेत नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में कुछ सीमाएं रखीं और पारंपरिक ईरानी सेना को पूरी तरह निशाना नहीं बनाया।

उधर ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि जब तक ईरानी जनता के अधिकारों की पूरी गारंटी नहीं मिलती, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

इसी दौरान ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन मार गिराने का दावा किया है, जबकि अमेरिका ने ईरान की ओर बढ़ रहे एक मालवाहक जहाज को ओमान की खाड़ी में रोकने की जानकारी दी है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य में संदिग्ध समुद्री बारूदी सुरंग देखे जाने के बाद समुद्री यातायात को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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