बिजली निजीकरण के खिलाफ 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल, इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल संसद में पेश होते ही ‘लाइटनिंग एक्शन’ की चेतावनी

January 30, 2026 9:39 PM
Electricity Amendment Bill

नई दिल्ली। बिजली क्षेत्र के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल (Electricity Amendment Bill) 2025 के विरोध में देशभर के बिजली अभियंताओं ने बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल का औपचारिक नोटिस केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को सौंप दिया है।

AIPEF देश के विभिन्न राज्य विद्युत निगमों, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA), दामोदर घाटी निगम (DVC) और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में कार्यरत बिजली अभियंताओं का प्रतिनिधि संगठन है।

AIPEF के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि यह हड़ताल बिजली क्षेत्र में लागू की जा रही उन नीतियों के खिलाफ है, जो सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर कर निजी कंपनियों के हवाले करने की दिशा में बढ़ रही हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पेश किया गया, तो बिजली अभियंता और कर्मचारी तत्काल ‘लाइटनिंग एक्शन’ शुरू करेंगे, जिसमें कार्यस्थल छोड़कर व्यापक जन-आंदोलन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि बिजली देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, उद्योग और ग्रामीण जीवन की रीढ़ है। उनके मुताबिक इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 और प्रस्तावित राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 सस्ती बिजली, सार्वजनिक स्वामित्व, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा हमला हैं।

AIPEF ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिजली क्षेत्र में आक्रामक निजीकरण थोप रही है। वितरण में मल्टी-लाइसेंसिंग, जबरन स्मार्ट मीटरिंग, ट्रांसमिशन में PPP और TBCB मॉडल, संचालन का आउटसोर्सिंग और नौकरियों का ठेकेदारीकरण पूरे बिजली तंत्र को अस्थिर कर रहा है।

फेडरेशन ने चंडीगढ़ के असफल निजीकरण मॉडल का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में इसी तरह के प्रयोग गंभीर संकट पैदा कर सकते हैं।

AIPEF ने केंद्र सरकार से इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को तत्काल वापस लेने, शांति अधिनियम (SHANTI Act) 2025 को रद्द करने, राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 को वापस लेने, बिजली निगमों के निजीकरण पर पूर्ण विराम लगाने, स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग योजना समाप्त करने, ठेका प्रथा खत्म कर संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण करने, सुरक्षा और विश्वसनीयता प्रभावित कर रही रिक्तियों पर तत्काल भर्ती करने, बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने और राज्यों पर केंद्र द्वारा योजनाओं के जरिए बनाए जा रहे दबाव को रोकने की मांग की है।

शैलेन्द्र दुबे ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गंभीर संवाद से इंकार किया गया, तो बिजली आपूर्ति में होने वाले किसी भी व्यवधान की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बिजली अभियंताओं के पास संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। 2022 से दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर के तौर पर काम किया है। इस दौरान स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन खबरें लिखीं। दैनिक भास्‍कर से पहले नवभारत, नईदुनिया, पत्रिका अखबार में 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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