रायपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) अभियान के बीच छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संभागस्तरीय कार्यक्रम के आयोजन के लिए नियुक्त किए गए युवा कांग्रेस अध्यक्ष आकाश शर्मा और एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे की जिम्मेदारी महज दो दिन में ही वापस ले ली। प्रदेश कांग्रेस द्वारा जारी स्थगन आदेश के बाद पार्टी के भीतर इसकी वजह को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
प्रदेश कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि इस फैसले के पीछे संगठन के भीतर चल रही अंदरूनी राजनीति और एक वरिष्ठ नेता की नाराजगी को वजह माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।
दरअसल, AICC के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने 22 जून को पत्र जारी कर 25 जून से 9 अगस्त तक देशभर में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान चलाने की घोषणा की थी। अभियान के तहत देश के प्रमुख शहरों में सिटी कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए गए। छत्तीसगढ़ में बिलासपुर को इस अभियान का केंद्र बनाया गया और वहां की जिम्मेदारी युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा को सौंपी गई और राष्ट्रीय स्तर पर यह अभियान फिलहाल जारी है।
इसी अभियान के तहत छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने दो दिन पहले संभागस्तरीय ‘छात्रों की गूंज-रैली’ कार्यक्रमों के आयोजन के लिए आकाश शर्मा और एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे को प्रदेश समन्वयक नियुक्त किया था। लेकिन 14 जुलाई को प्रदेश कांग्रेस ने नया आदेश जारी कर दोनों नेताओं की नियुक्ति को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया।
प्रदेश कांग्रेस के इस फैसले के बाद कांग्रेस, युवा कांग्रेस और एनएसयूआई से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
प्रदेश कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर जब AICC पहले ही आकाश शर्मा को बिलासपुर का सिटी कोऑर्डिनेटर बना चुकी थी, इसलिए प्रदेश कांग्रेस ने भी उसी कार्यक्रम के लिए उन्हें संभाग स्तर पर समन्वयक बनाया। लेकिन बाद में संगठन के एक कद्दावर नेता की नाराजगी सामने आने के बाद नियुक्ति को स्थगित करने का फैसला लिया गया।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, आकाश शर्मा और नीरज पांडे कभी कांग्रेस के उन्हीं वरिष्ठ नेता के करीबी माने जाते थे, जिनकी नाराजगी की वजह से नियुक्ति को स्थगित कर दिया है।
युवा कांग्रेस के हालिया संगठनात्मक चुनावों के दौरान भी उसी वरिष्ठ नेता और एक युवा नेता के अलग-अलग गुट में भूमिका को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के अभियान से जुड़े एक कार्यक्रम में संभाग स्तर पर समन्वयकों की नियुक्ति का अचानक स्थगित होना संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।
ऐसे में अब कांग्रेस के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि जब राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से अभियान जारी है और बिलासपुर में सिटी कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी यथावत है, तब प्रदेश स्तर पर समन्वयकों की नियुक्ति क्यों की गई और फिर दो दिन बाद इसे अचानक क्यों रोक दिया गया।









