वनतारा के खिलाफ याचिका दोबारा खारिज

Petition against Vantara dismissed again

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के जामनगर में स्थित वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र वंतारा द्वारा लुप्तप्राय प्रजातियों के आयात में अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली एक और याचिका को खारिज कर दिया है।कोर्ट ने पिछले साल दायर एक समान PIL में इस मुद्दे पर पहले ही फैसला सुना चुका है।

पीठ ने कहा कि पिछले साल दायर याचिका में इस मुद्दे की जांच हो चुकी है। कोर्ट ने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कानूनी रूप से आयातित जीवित जानवरों, जिनमें बचाए गए जानवर भी शामिल हैं, के स्थापित पर्यावरण, संरक्षण और जीवन की स्थिति को परेशान करना खुद क्रूरता का कारण बन सकता है।”

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने करणार्थम विरमाह फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया।

याचिका में केंद्र सरकार, सेंट्रल जू अथॉरिटी और अन्य को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे 2019 से ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर जिसे लोकप्रिय रूप से वंतारा कहा जाता है और राधा कृष्ण टेम्पल एलीफेंट वेलफेयर ट्रस्ट को दी गई अनुमतियों, मान्यताओं और आयात और निर्यात लाइसेंस से संबंधित पूरी रिकॉर्ड कोर्ट के सामने पेश करें।

पीठ ने कहा कि यह मुद्दा पिछले साल अधिवक्ता जया सुकिन द्वारा दायर याचिका में पहले ही विचार किया जा चुका है।

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