नई दिल्ली। NEET और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को लेकर देशभर में उठ रहे सवालों के बीच मंगलवार को संसद परिसर में एक ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने खुद संसदीय प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। जिन युवा डॉक्टरों और मेडिकल प्रतिनिधियों को संसदीय समिति ने आधिकारिक तौर पर बुलाया था, उन्हें ऐन वक्त पर बैठक में शामिल होने से रोक दिया गया।
शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में NEET और परीक्षा प्रणाली पर चर्चा होनी थी। इसके लिए यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) के प्रतिनिधिमंडल को बाकायदा निमंत्रण भेजा गया था। डॉक्टर देश के अलग-अलग राज्यों से संसद पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें बताया गया कि अब वे बैठक में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
सूत्रों के मुताबिक समिति के कुछ सांसदों ने डॉक्टरों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। मामला इतना बढ़ गया कि समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को खुद बैठक से बाहर आना पड़ा।
बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर इस स्थिति पर खेद व्यक्त किया और कहा कि कुछ सदस्यों के विरोध के कारण उन्हें समिति के सामने प्रस्तुत होने का अवसर नहीं दिया जा सका। हालांकि उन्होंने डॉक्टरों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और सुझावों को रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने का आश्वासन दिया।
सवालों से डर गई व्यवस्था?
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के चेयरपर्सन डॉ. लक्ष्य मित्तल ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि औपचारिक निमंत्रण के बावजूद हितधारकों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला।
उनका कहना है कि जब करोड़ों छात्रों के भविष्य और देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हों, तब उन लोगों को ही नहीं सुना गया जो वर्षों से परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब NEET और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और NTA लगातार सवालों के घेरे में हैं। पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बनी हुई है।
NTA को भंग करने की मांग
यूडीएफ ने अपने ज्ञापन में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग कर संसद के अधिनियम के जरिए नई परीक्षा संस्था बनाने की मांग की है।
संगठन ने NEET-UG 2024 और NEET-UG 2026 से जुड़े विवादों की व्यापक जांच की मांग करते हुए कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं, जिनमें पेपर लीक के आरोप, ग्रेस मार्क्स विवाद, परीक्षा केंद्र आवंटन पैटर्न, निजी एजेंसियों और वेंडरों की भूमिका, परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था और NTA द्वारा राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ के उपयोग की वैधता जैसे विषय शामिल हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि डॉक्टरों और विशेषज्ञों को समिति के सामने नहीं सुनना था, तो उन्हें एक सप्ताह पहले आधिकारिक निमंत्रण क्यों भेजा गया? यूडीएफ का दावा है कि उनका लिखित ज्ञापन, दस्तावेज और प्रेजेंटेशन पहले ही समिति को सौंपा जा चुका था और सांसदों के बीच वितरित भी किया गया था।
संगठन का आरोप है कि संभवतः ज्ञापन में उठाए गए कुछ गंभीर मुद्दों के कारण अंतिम समय में उनका प्रवेश रोक दिया गया।
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