मालदा हिंसा : मुख्य साजिशकर्ता एयरपोर्ट पर गिरफ्तार, जांच में NIA की एंट्री

April 3, 2026 7:39 PM
Malda Violence

लेंस डेस्‍क। पश्चिम बंगाल के मालदा में 1 अप्रैल को मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर भड़की हिंसा में मुख्‍य साजिशकर्ता को बागडोगरा  एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया है। साजिशकर्ता मोफक्करुल इस्लाम  AIMIM का नेता बताया जा रहा है। इस मामले में कुल 19 गिरफ्तारियां हुई हैं। घटना की जांच के लिए NIA की एंट्री भी हो गई है। जिसके बाद से राज्‍य का सियासी माहौल गर्म हो गया है।

गौरतलब है कि 1 अप्रैल को हजारों स्थानीय लोगों ने ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO) के दोनों गेटों को घेर लिया और सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 8-9 घंटे तक अंदर बंदक बनाकर रखा। इन अधिकारियों में तीन महिलाएं शामिल थीं, साथ ही एक अधिकारी का पांच साल का नाबालिग बच्चा भी उनके साथ फंसा हुआ था।

भीड़ ने SIR प्रक्रिया के दौरान नाम कटने वाले मतदाताओं के मुद्दे पर आक्रोश जताया, जिसके चलते कुछ जगहों पर पथराव, आगजनी और हिंसा की घटनाएं भी हुईं। रात के करीब 12 बजे के बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों की मदद से अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

इस पूरे मामले में पुलिस ने अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें मोथाबाड़ी सीट से इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और AIMIM (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) के नेता व वकील मोफक्करुल इस्लाम शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक, मोफक्करुल इस्लाम को इस घटना का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है। वह BDO कार्यालय के बाहर भीड़ को उकसाते हुए भाषण दे रहा था और लोगों से जगह न छोड़ने की अपील कर रहा था। 2 अप्रैल को 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें अदालत ने 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। तीसरे दिन 3 अप्रैल को CID की टीम ने सिलीगुड़ी के बागडोगरा एयरपोर्ट से इस्लाम को दबोच लिया, जब वह राज्य से भागने की कोशिश कर रहा था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस्लाम के खिलाफ ठोस सबूत मिलने के बाद से उसकी तलाश चल रही थी। खुफिया इनपुट के आधार पर विशेष टीम ने एयरपोर्ट पर जाल बिछाया और टर्मिनल के पास से उसे पकड़ लिया। इस्लाम पेशे से वकील है और 2021 के विधानसभा चुनाव में इतहार सीट से AIMIM का उम्मीदवार भी रह चुका है। पुलिस का कहना है कि वह कानून की जानकारी रखते हुए भी फरार होने की योजना बना रहा था, लेकिन CID की सतर्कता ने उसे रोक लिया।

इस घटना की जांच अब और गंभीर हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर सख्त टिप्पणी करते हुए इसे न्यायिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ने की सोची-समझी साजिश बताया और चुनाव आयोग (ECI) को केंद्रीय एजेंसी (CBI या NIA) से जांच कराने का निर्देश दिया। इसके बाद ECI ने NIA को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर प्रारंभिक जांच सौंप दी। NIA की टीम अब मैदान में उतर चुकी है। पुलिस की ओर से एक विशेष जांच दल बनाया गया है, जिसका नेतृत्व DIG रैंक के अधिकारी कर रहे हैं और IG स्तर के अधिकारी को नियमित अपडेट दिए जा रहे हैं।

ममता का AIMIM पर हमला

ममता बनर्जी ने घटना को लेकर चुनावी रैलियों (खासकर मुर्शिदाबाद के सागरदीघी में) में AIMIM और ISF को सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि ये दोनों संगठन मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं, जबकि कांग्रेस और भाजपा ने इसे भड़काने की कोशिश की। ममता ने इसे भाजपा की साजिश बताया, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हैं। उनके अनुसार, इसका मकसद बंगाल में चुनाव रद्द कराने और राष्ट्रपति शासन लगवाने का है।

उन्होंने दावा किया कि उन्हें घटना की कोई सूचना नहीं दी गई और “प्रशासन अब उनके हाथ में नहीं है”। चुनाव आयोग MCC के कारण कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण ले चुका है, जो अमित शाह के इशारे पर काम कर रहा है। ममता ने अल्पसंख्यक समुदाय से अपील की कि वे शांत रहें और भाजपा के “फंसाने वाले जाल” में न फंसें। साथ ही उन्होंने CID की गिरफ्तारी का श्रेय अपनी सरकार को दिया, क्योंकि CID MCC के दायरे से बाहर है। उन्होंने अमित शाह से इस्तीफा की मांग भी की।

बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया

भाजपा ने इस घटना को ममता बनर्जी सरकार में “जंगल राज” और कानून-व्यवस्था के पूर्ण विफलता का सबूत बताया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया और राज्य प्रवक्ता देबजित सरकार ने कहा कि TMC ने नकली वोटरों के नाम कटने से घबराकर “जिहादी तत्वों” को उकसाया और न्यायिक अधिकारियों (महिलाओं सहित) को घंटों गर्मी-नमी में बंधक बनाया।

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने पूछा कि क्या ममता की पार्टी की उकसावे की वजह से यह हुआ और जिन लोगों के नाम कटे, वे असल में भारतीय नागरिक थे या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग की। स्मृति इरानी समेत अन्य नेताओं ने इसे TMC के भ्रष्टाचार और हिंसा की संस्कृति से जोड़ा। भाजपा का आरोप है कि TMC चुनाव हारने के डर से SIR प्रक्रिया को बाधित कर रही है।

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