लेंस डेस्क। देश की प्रमुख आईवियर कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस को बिंदी, तिलक और अन्य धार्मिक प्रतीकों से जुड़े एक विवाद ने भारी नुकसान पहुंचाया है। सोमवार को शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कंपनी की मार्केट वैल्यूएशन में एक समय 4,540 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आ गई।
दिन के निचले स्तर पर वैल्यूएशन 88,331 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि पिछले सप्ताह यह 92,872 करोड़ रुपये के आसपास थी। बाद में थोड़ी रिकवरी हुई और दोपहर 3 बजे के आसपास वैल्यूएशन करीब 92,038 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।
Lenskart Controversy: विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

विवाद की जड़ एक पुरानी इंटरनल ग्रूमिंग और ड्रेस कोड पॉलिसी के वायरल होने से बनी। इसमें कस्टमर-फेसिंग रोल्स में बिंदी, तिलक, कलावा जैसे हिंदू धार्मिक निशानों पर रोक लगाई गई थी, जबकि हिजाब (काला रंग) और पगड़ी जैसी चीजों को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी। इसे धार्मिक भेदभाव बताया गया, जिससे सोशल मीडिया पर तेज आलोचना और बॉयकॉट की मांग उठी।
विवाद और तूल पकड़ा जब बीजेपी नेता नाजिया इलाही खान मुंबई के एक लेंसकार्ट शोरूम में पहुंचीं। उन्होंने स्टोर मैनेजर से सवाल किया और हिंदू कर्मचारियों को भगवा तिलक लगाया। वायरल वीडियो में वे मैनेजर को फटकार लगाते हुए सुनाई दे रही हैं और पूछ रही हैं कि “क्या आप इस देश में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं?” कई अन्य लोग भी कंपनी की नीति का विरोध कर रहे हैं।
यह विवाद सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रहा। देश के कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शन और विरोध देखने को मिला। बेंगलुरु (कर्नाटक) और पुणे (महाराष्ट्र) में हिंदू संगठनों (जिसमें बाजरंग दल भी शामिल) के कार्यकर्ताओं ने लेंसकार्ट के स्टोर्स पर पहुंचकर कर्मचारियों को तिलक लगाया।
सूरत, दिल्ली, भोपाल, देहरादून, लखनऊ समेत अन्य शहरों से भी विरोध की खबरें आईं। कई जगहों पर लोग स्टोर में जाकर बिंदी-तिलक लगाकर या धार्मिक प्रतीक पहनकर अपनी एकजुटता दिखा रहे हैं। कुछ वीडियो में चश्मे तोड़ने या फेंकने जैसी घटनाएं भी वायरल हुईं।
लेंसकार्ट की सफाई और नई पॉलिसी
कंपनी के फाउंडर और सीईओ पेयुष बंसल ने स्पष्ट किया कि वायरल हुआ डॉक्यूमेंट पुराना वर्जन है और यह कंपनी की मौजूदा गाइडलाइंस को नहीं दर्शाता। उन्होंने कहा कि लेंसकार्ट में किसी भी धार्मिक पहनावे या निशान (बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा आदि) पर कोई रोक नहीं है। गलतफहमी के लिए माफी भी मांगी।
बाद में कंपनी ने सार्वजनिक रूप से माफी जारी की और एक नई ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ जारी की। नई नीति में साफ कहा गया है कि कर्मचारियों द्वारा पहने जाने वाले सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का “साफ तौर पर और बिना किसी शक के” स्वागत है। इसमें बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी सब शामिल हैं। कंपनी ने कहा, “अगर हमारे किसी भी कम्युनिकेशन से किसी को ठेस पहुंची या किसी टीम मेंबर को लगा कि उनका धर्म यहां स्वागत योग्य नहीं है, तो हमें गहरा अफसोस है। लेंसकार्ट ऐसी कंपनी नहीं है और न कभी बनेगी।”











