भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (KISS) में एक दुखद घटना ने सबको चौंका दिया है। यहां नौवीं कक्षा के एक आदिवासी छात्र की उसके ही साथ पढ़ने वाले छात्रों ने कथित तौर पर हत्या कर दी। संस्थान के प्रबंधन पर मामले को छिपाने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह पिछले एक साल में इस संस्थान में छात्रों की मौत की तीसरी घटना है, लेकिन हर बार इसे दबाने की कोशिश की गई। आरोप लग रहे हैं कि संस्थान के संस्थापक अच्युत सामंता के राजनीतिक और प्रशासनिक कनेक्शन के चलते घटनाओं को दबाया छिपाया जा रहा है।
ताजा घटना 11 दिसंबर की रात को KISS के हॉस्टल में हुई। केओनझार जिले के रहने वाले इस छात्र का उसके सहपाठियों के साथ झगड़ा हो गया। पुलिस जांच में पता चला कि छात्र का गला दबाकर मार दिया गया। लेकिन शुरू में स्कूल प्रशासन ने इसे दुर्घटना बताकर छिपाने की कोशिश की। छात्र को KIMS अस्पताल (जो KISS और KIIT का ही हिस्सा है) ले जाया गया, जहां बिना पोस्टमॉर्टम के मौत को हार्ट अटैक बताया गया। परिवार को शव सौंप दिया गया, लेकिन कोई मेडिकल रिपोर्ट या कागजात नहीं दिए गए।
परिवार ने शव पर चोट के निशान देखे और हत्या का शक जताया। छात्र के पिता रघुनाथ मुंडा ने कहा, “हमें मौत को दुर्घटना बताया गया, लेकिन कोई दस्तावेज नहीं दिए। हमें लगा कि कुछ गड़बड़ है।” पुलिस ने जांच की तो हत्या की पुष्टि हुई। तीन छात्रों को हिरासत में लिया गया और आठ शिक्षकों-कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया, क्योंकि उन्होंने मामले को छिपाने में मदद की। ओडिशा टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा कि स्कूल प्रशासन ने जानबूझकर घटना को दबाया।
यह पहली बार नहीं है जब KISS में ऐसी घटना हुई हो। फरवरी 2025 में KIIT में एक नेपाली छात्रा प्रक्रिति लम्साल का शव हॉस्टल में मिला था, जिसे आत्महत्या बताया गया। लेकिन उसमें भी छिपाने के आरोप लगे। नेपाली छात्रों पर हमला हुआ और उन्हें हॉस्टल से निकाला गया, जो अंतरराष्ट्रीय विवाद बन गया। ट्राइबल नेता हरबाती गोंडा ने ओडिशा टीवी को बताया, “कई छात्र गायब हुए या मारे गए, लेकिन सब छिपाया जाता है।”
KISS के संस्थापक अच्युत सामंता पर क्यों उठ रहे सवाल?
इस मामले में सबसे ज्यादा सवाल संस्थान के संस्थापक अच्युत सामंता पर उठ रहे हैं। 61 साल के सामंता ने 1992 में KIIT की शुरुआत की, जो अब 40,000 छात्रों वाला बड़ा संस्थान है। KISS आदिवासी बच्चों को मुफ्त शिक्षा देता है, लेकिन अब इसे व्यापार कहा जा रहा है। सामंता बीजेडी से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और 2019 में लोकसभा चुनाव जीते, लेकिन 2024 में हार गए। बीजेपी विधायक बाबू सिंह ने कहा कि सामंता ने राजनीतिक प्रभाव से अपना साम्राज्य बढ़ाया।
संस्थान के प्रबंधन में ज्यादातर रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारी या उनके परिवार के लोग हैं, जो अभी भी प्रशासन से जुड़े हैं। दलित आदिवासी महासंघ के अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा, “वे सामंता का बचाव करते हैं क्योंकि वह राजनीतिक नेता हैं।” एक वायरल वीडियो में सामंता कहते हैं, “कई लोग मेरे पीछे पड़े हैं, लेकिन मुझे कुछ नहीं कर सकते।” यह वीडियो छात्र मौतों के बीच आया है। पत्रकार संबित पारिदा ने X (ट्विटर) पर पांच सवाल उठाए: क्या सामंता को हत्या की जानकारी थी? क्यों पुलिस को तुरंत नहीं बताया गया?
ट्राइबल संगठन, कार्यकर्ता और राजनीतिक नेता अब सामंता पर हमलावर हैं। वे कहते हैं कि KISS ने आदिवासी परिवारों का भरोसा तोड़ा है। सीबीआई जांच की मांग हो रही है। पूर्व ट्राइबल अफेयर्स मंत्री परमा पुजारी ने कहा, “संस्थान में छात्रों की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही है।” सुंदरगढ़ ट्राइबल वेलफेयर एसोसिएशन के परमेश्वर नायक ने इसे जघन्य अपराध बताया। ओडिशा ह्यूमन राइट्स कमीशन में शिकायत दर्ज की गई है।











