Goa Nightclub Fire: गोवा के अरपोरा इलाके में स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइट क्लब में शनिवार देर रात लगी भीषण आग ने 25 लोगों की जान ले ली, जबकि कई लोग घायल हुए। आग की शुरुआत ऊपरी मंजिल से हुई, जहां बंद दरवाजों और अपर्याप्त वेंटिलेशन की वजह से लोग फंस गए और दम घुटने से मौतें हुईं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखा कि कार्यक्रम के दौरान क्लब के अंदर आतिशबाजी की गई, जो संभवतः आग का कारण बनी। इस हादसे के बाद गोवा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए क्लब के मालिकों सौरभ और गौरव लूथरा, मैनेजरों और कार्यक्रम आयोजकों के खिलाफ हत्या और लापरवाही के आरोप में FIR दर्ज की।
इसके बाद फोरेंसिक और सर्च टीमें अभी भी जले हुए मलबे की जांच कर रही हैं, क्योंकि क्लब ऐसी जगह म में बना था जहां निर्माण की अनुमति नहीं थी, संकरी गलियां और नदी के किनारे की लोकेशन ने आग बुझाने में भी बाधा डाली, जिससे हादसा और भयानक हो गया।
लूथरा ब्रदर्स कौन हैं?
सौरभ और गौरव लूथरा दिल्ली के रहने वाले दो भाई हैं, जिनकी उम्र क्रमशः 40 और 44 साल है। दोनों ने मिलकर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में बड़ा कारोबार खड़ा किया है। सौरभ गोल्ड मेडलिस्ट इंजीनियर हैं,उसने 2016 में रोमियो लेन नाइट क्लब की शुरुआत की और धीरे-धीरे इसे देश के 22 शहरों तक फैला दिया। उनके बिजनेस में रेस्टोरेंट, बार और क्लब शामिल हैं, जो चार अन्य देशों में भी चल रहे हैं। एक तीसरे पार्टनर की भी भूमिका सामने आ रही है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।
दिल्ली में उनके घर पर छापे के दौरान पुलिस को परिवार से पूछताछ करनी पड़ी, लेकिन दोनों भाई वहां नहीं मिले। उनके डिफेंस कॉलोनी वाले पुराने बार को छह महीने पहले बंद किया गया था, जबकि सिविल लाइंस में चल रहे रेस्टोरेंट को एमसीडी ने स्वच्छता और क्षमता से ज्यादा ग्राहकों को बैठाने के लिए नोटिस दिया था। हादसे के बाद पुलिस पूरे देश में उनके कारोबार की जांच कर रही है, ताकि अन्य उल्लंघनों का पता लगाया जा सके।
गिरफ्तारियां और पुलिस की कार्रवाई, मैनेजरों से शुरू हुई जांच
हादसे के बाद गोवा पुलिस ने तेजी दिखाते हुए क्लब के चीफ जनरल मैनेजर राजीव मोदक, जनरल मैनेजर विवेक सिंह, बार मैनेजर राजीव सिंघानिया और गेट मैनेजर रियांशु ठाकुर को गिरफ्तार किया। रविवार रात दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की मदद से मैनेजर भरत कोहली को भी पकड़ा गया, जो क्लब के दैनिक कामकाज संभालता था। इन गिरफ्तारियों से पूछताछ में मालिकों के नाम सामने आए। पुलिस ने लूथरा भाइयों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया और दिल्ली में उनके घर के बाहर नोटिस चिपकाया।
मुंबई एयरपोर्ट के रिकॉर्ड से पता चला कि आग लगने के तीन घंटे बाद ही वे दिल्ली से फुकेट के लिए फ्लाइट (इंडिगो 6E 1073) लेकर भाग गए। अब सीबीआई के इंटरपोल विंग से ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी है, जो उनके ठिकाने और गतिविधियों की जानकारी जुटाने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि जांच से साफ हो रहा है कि क्लब में कई सुरक्षा नियमों की अनदेखी हुई, जिसने हादसे को बढ़ावा दिया।
लूथरा भाइयों ने थाईलैंड क्यों चुना ?
लूथरा भाइयों ने फुकेत, थाईलैंड को भागने के लिए चुना जिसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। थाईलैंड भारतीयों के लिए वीजा ऑन अराइवल की सुविधा देता है, यानी वीजा प्रक्रिया सरल और त्वरित है, जो आपात स्थिति में भागने के लिए आदर्श है। दिल्ली से फुकेट की सीधी उड़ान उपलब्ध होने से वे जल्दी निकल सके। फुकेट एक बड़ा पर्यटन केंद्र है, जहां लाखों विदेशी आते हैं, जिससे भीड़ में छिपना आसान हो जाता है। उनके हॉस्पिटैलिटी बिजनेस के चलते वहां नेटवर्क या संपर्क भी हो सकते हैं।
हालांकि भारत और थाईलैंड के बीच 2015 से एक्सट्राडिशन संधि है, लेकिन अपराधी अक्सर इसे चुनते हैं क्योंकि प्रक्रिया लंबी होती है, जिसमें स्थानीय अदालतें सबूत, अपराध की गंभीरता और मानवाधिकारों का मूल्यांकन करती हैं। इससे उन्हें कुछ समय मिल जाता है कानूनी लड़ाई लड़ने का।
भारत वापस लाना कितना मुश्किल?
लूथरा भाइयों को थाईलैंड से भारत वापस लाना एक लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया होगी। भारत और थाईलैंड के बीच प्रत्यर्पण संधि होने से आधार तो है, लेकिन सरकार को साबित करना पड़ेगा कि उनके खिलाफ गंभीर अपराध दर्ज हैं और भारत में जांच के लिए उनकी मौजूदगी जरूरी है। थाई अदालतें सबूतों की जांच करेंगी, साथ ही आरोपी के मानवाधिकारों पर विचार करेंगी, जो प्रक्रिया को महीनों या सालों तक खींच सकती है।
इसके पहले भी विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और ललित मोदी जैसे मामलों में भी एक्सट्राडिशन में सालों लगे और कुछ में अब तक सफलता नहीं मिली। ब्लू कॉर्नर नोटिस से उनके ठिकाने का पता लगाना पहला कदम होगा, लेकिन गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। अगर लूथरा ब्रदर्स राजनीतिक या आर्थिक रसूख का इस्तेमाल करें, तो मुश्किल और बढ़ सकती है। कुल मिलाकर सिस्टम की गति पर निर्भर करेगा कि यह मामला जल्द सुलझेगा या लंबा खिंचेगा।











