Chhattisgarh Assembly winter session 2025 : छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन हंगामेदार रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने नेशनल हेराल्ड मामले में कोर्ट के फैसले का जश्न मनाते हुए ‘सत्यमेव जयते’ लिखी तख्तियां दिखाईं और नारेबाजी की। इससे सदन में काफी शोर-शराबा हुआ और कार्यवाही दो बार 10-10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने तख्तियां लेकर सदन में बैठने की अनुमति नहीं दी।
विपक्ष के लगातार हंगामे पर स्पीकर ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकहित के मुद्दों पर चर्चा बाधित करना ठीक नहीं। विपक्षी सदस्य संसदीय परंपराओं को जानते हैं, फिर भी ऐसा व्यवहार अमर्यादित है। स्पीकर ने आगे ऐसा न करने की चेतावनी दी।हंगामा उस वक्त और बढ़ गया जब विपक्ष ने ‘सत्यमेव जयते’ के नारे लगाए और सत्ता पक्ष ने ‘वंदे मातरम’ से जवाब दिया। नेता प्रतिपक्ष भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाकर सरकार पर हमला बोला। सत्ता पक्ष के मंत्री अजय चंद्राकर ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि विपक्ष के दावे बेबुनियाद हैं। विपक्ष ने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर स्थगन प्रस्ताव लाया, लेकिन स्पीकर ने इसे स्वीकार नहीं किया।
35 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश
हंग के बीच सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने 35 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। यह राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट है। वित्तीय वर्ष के आखिरी तीन महीनों में पेश इस बजट पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस हुई। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस बजट से प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी। सत्ता पक्ष के विधायक अजय चंद्राकर ने इसे ऐतिहासिक बताया और कहा कि राजस्व खर्च बढ़ाने की शुरुआत पिछली कांग्रेस सरकार ने की थी। उन्होंने धान खरीदी को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप भी लगाया।
विपक्ष की ओर से कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने बजट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य कर्ज में डूबता जा रहा है। इतने बड़े बजट की जरूरत क्यों पड़ी, यह समझ नहीं आता। बजट में कोई स्पष्ट विजन नहीं दिखता। महिलाओं को महतारी वंदन योजना में 1000 रुपये मिलते हैं लेकिन बिजली बिल ज्यादा आ रहा है। सरकार काम से ज्यादा इवेंट पर फोकस कर रही है।
राघवेंद्र सिंह ने नए पदों पर भर्ती, नियमितीकरण और किसानों को समय पर भुगतान जैसे वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने सड़क, धान खरीदी, आदिवासी, किसान, युवा और महिलाओं के विकास के लिए ठोस लक्ष्य तय करने की मांग की। शीतकालीन सत्र का यह आखिरी दिन होना था लेकिन कार्यवाही अब 2 दिन आगे बढ़ा दी गयी है।









