SIR से तंग आकर देश भर में तीन BLO ने किया सुसाइड, केरल, राजस्थान में भड़का आंदोलन

West Bengal Sir

नई दिल्ली। एक तरफ बिहार चुनाव के नतीजों ने SIR की प्रक्रिया की वजह से भारी असर पड़ने की बात कही जा रही है विपक्ष कह रहा है कि हमारी हार के पीछे चुनाव आयोग द्वारा की गई SIR प्रक्रिया जिम्मेदार है। वहीं इस प्रक्रिया को पूरे देश में अलग अलग लागू किए जाने के बाद से तीन BLO द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबर मिल रही है।

शिक्षक मुकेश जांगिड़

मध्य प्रदेश में दतिया के शिक्षक उदयभान सिहारे लंबे समय से बीएलओ का अतिरिक्त दायित्व निभा रहे थे। परिवारजनों के मुताबिक हाल के दिनों में चुनाव कार्यों से संबंधित रिपोर्टिंग, डाटा अपडेट और लगातार मिल रहे निर्देशों से वे मानसिक रूप से परेशान थे। 50 वर्षीय शिक्षक उदयभान सिहारे मंगलवार की सुबह विद्यालय पहुंचे और कुछ देर बाद उनका शव एक कमरे में फंदे से लटकता हुआ मिला

भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण के बीच, केरल के कन्नूर ज़िले में एक बूथ लेवल अधिकारी काम के दबाव के कारण आत्महत्या कर ली। पेशे से स्कूल अटेंडेंट, 41 वर्षीय अनीश जॉर्ज रविवार, 16 नवंबर को पय्यान्नूर के पास एट्टुकुडुक्का स्थित अपने घर में मृत पाए गए।

अनीश राज्य के उन 25,000 से ज़्यादा बीएलओ में से एक थे जो एसआईआर गणना फ़ॉर्म वितरित करने और एकत्र करने के लिए ज़िम्मेदार थे। केरल में एसआईआर प्रक्रिया 4 नवंबर को शुरू हुई थी। इससे पहले, राज्य भर के कई बीएलओ ने काम के बोझ और अपने वरिष्ठों द्वारा लगाई गई अनौपचारिक समय सीमा को लेकर चिंता जताई थी। अनीश की मौत को लेकर केरल में प्रदर्शन हो रहे हों।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक शिक्षक ने काम से परेशान होकर आत्महत्या कर ली है। जिसके बाद प्रदेश भर में आंदोलन शुरू हो गए हैं। देशभर में सरकारी स्कूल के शिक्षकों को बीएलओ का काम दिया गया है, जिसके चलते उन पर काम का बोझ बढ़ा है। बताया जा रहा है कि काम के बोझ से परेशान होकर शिक्षक मुकेश जांगिड़ ने आत्महत्या कर ली है। मुकेश ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या की है। उसके जेब से एक सुसाइड नोट भी मिला है।

मुकेश की मौत के बाद शिक्षक संघ पूरे राजस्थान में विरोध प्रदर्शन कर रहा हैं। शिक्षक संघ का कहना है कि जिला प्रशासन इस काम में आगे रहकर वाहवाही लूटना चाहता है, जिसके चलते फील्ड में BLO के तौर पर काम कर रहे कार्मिकों पर दबाव बनाया जा रहा है। संघ ने यह सवाल भी उठाया है कि अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं भी शुरू हो रही हैं। ऐसे में स्कूलों में अध्यापक नहीं हैं। बच्चों की पढ़ाई नुकसान हो रहा है।

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