सोमवार 10 नवंबर की शाम राजधानी दिल्ली स्थित लाल किले के नजदीक एक कार में हुआ दिल दहलाने वाला धमाका इस बात की चेतावनी है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। लाल किले के आसपास के बेहद भीड़भाड़ वाले इलाके में हुए इस धमाके में 12 लोगों की जानें चली गईं और अनेक लोग घायल हुए हैं।
13 सितंबर, 2008 को दिल्ली में हुए शृंखलाबद्ध बम धमाकों के 17 साल बाद हुए इस धमाके ने राजधानी और उसके आसपास के लोगों को दहशत में ला दिया है कि, वे ऐसे हमलों के प्रति सुरक्षित नहीं हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार धमाके को षडयंत्र करार देकर कहा है कि इसके पीछे के षडयंत्रकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। जाहिर है, शुरुआती सतर्कता के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह एक आतंकी घटना है।
इस हमले से कुछ घंटे पहले ही सुरक्षा बलों ने 2900 किलो विस्फोट के साथ कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था और अब इनके तार आपस में जुड़ रहे हैं, तो इसका मतलब यही है कि राजधानी तक पहुंच गए विस्फोटक और आतंकियों के खतरनाक इरादों को ध्वस्त करने में हमारी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां नाकाम रही।
अब तक की जानकारियों के मुताबिक इस धमाके को अंजाम देने वाला सरगना एक डॉक्टर उमर मोहम्मद था, जिसकी मौत धमाके में हो गई। उसके अलावा कुछ और डॉक्टरों को दिल्ली और लखनऊ से पकड़ा गया है। जाहिर है, एनआईए और अन्य जांच एजेंसियां आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां कर सकती हैं।
लेकिन यह चिंता की बात होनी चाहिए कि इसी साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को ध्वस्त करने के लिए चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बावजूद आतंकियों ने देश की राजधानी में दहशत फैलाई है और संभव है कि वे और बड़ा नुकसान कर सकते थे। और यह सब तब हुआ है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद को एक्ट ऑफ वार कहा है और दोहराया है कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है।
इस हमले के चार दिन पहले उन्होंने बिहार के औरंगाबाद में एक चुनावी सभा में कहा था, ‘मैंने पहलगाम हमले के बाद बदला लेने की बात कही थी और फिर आपने ऑपरेशन सिंदूर में तबाह होते पाकिस्तान को देखा।‘
उधर, राजधानी में हुए कार धमाके के अगले दिन यानी आज 11 नवंबर को पाकिस्तान में भी एक आतंकी हमले की खबर आई है, जिसमें कई लोग मारे गए हैं। आग से खेल रहे पाकिस्तान की तबाही का मंजर तो सबके सामने है ही, लेकिन हमारे यहां हुए कार धमाके की जवाबदेही का भी सवाल है।
जिन लोगों ने भी इस धमाके को अंजाम दिया है, वे मानवता के दुश्मन हैं, फिर वे इस मामले के संदिग्ध पढे-लिखे डॉक्टर ही क्यों न हों, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए।
लेकिन यही ठीक मौका है, जब यह पूछा जाए कि आतंकी आखिर इतने विस्फोटकों के साथ दिल्ली तक कैसे पहुंच गए? विपक्षी नेताओं ने तो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग कर दी है।
वास्तव में राजनीतिक सवालों से इतर इस धमाके को लेकर जवाबदेही तो सुनिश्चित की ही जानी चाहिए। आखिर पहलगाम हमले के बाद सरकार ने जीरो टॉलरेंस की बात की थी, उसके बावजूद इस हमले को अंजाम दिया गया है।
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