नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के अंतिम बचे मामले में सुरेंद्र कोली को बड़ी राहत देते हुए उसकी सजा रद्द कर दी और तुरंत रिहाई के आदेश दिए। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कोली की क्यूरेटिव पिटीशन मंजूर कर ली। कोर्ट ने साल 2011 का अपना ही पुराना फैसला पलट दिया, जिसमें कोली को रिम्पा हलदर हत्या मामले में दोषी ठहराया गया था।
इस फैसले के साथ ही कोली के खिलाफ दर्ज सारे मुकदमे खत्म हो गए। वह पहले ही निठारी की बाकी 12 घटनाओं में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बरी हो चुका था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले साल बरकरार रखा था। अब सिर्फ रिम्पा हलदर का केस बाकी था, जिसमें उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी।
जस्टिस सूर्यकांत ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि महज एक गवाह के बयान और रसोई से बरामद चाकू के आधार पर कोली को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने माना कि बाकी सभी मामलों में बरी होने के बाद एक ही केस में सजा बरकरार रखना उचित नहीं था।
निठारी कांड दिसंबर 2006 में उस वक्त सुर्खियों में आया जब नोएडा के सेक्टर-31 स्थित मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले से कई बच्चों के अवशेष मिले थे। पंढेर का घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली मुख्य आरोपी बना। सीबीआई ने कोली पर हत्या, बलात्कार, अपहरण और सबूत मिटाने के कई मामले दर्ज किए थे, जबकि पंढेर पर मुख्य रूप से अनैतिक गतिविधियों का आरोप लगा।
समय के साथ दोनों अदालतों से बार-बार राहत मिलती गई। कोली को दस से ज्यादा मामलों में मौत की सजा मिली थी, लेकिन 2015 में हाईकोर्ट ने देरी के आधार पर उसे उम्रकैद में बदल दिया। 2023 में हाईकोर्ट ने 12 अन्य मामलों में कोली और दो में पंढेर को पूरी तरह बरी कर दिया। सीबीआई की अपीलें भी सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2024 में खारिज कर दीं।
आज का फैसला आने के बाद कोली को जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है, बशर्ते उसके खिलाफ कोई और मामला न हो। निठारी कांड, जो कभी देश के सबसे भयावह सीरियल किलिंग केस के रूप में जाना जाता था, अब कानूनी तौर पर पूरी तरह खत्म हो चुका है।

