बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए आज दूसरे चरण के मतदान हो रहे हैं। लेकिन तमाम मुद्दों के बीच लगता है कि लोगों ने और राजनीतिक दलों ने दरभंगा में दस सालों से निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मुद्दे को भुला दिया है। द लेंस ने लोगों के बीच जाकर जानने की कोशिश की कि आखिर Darbhanga AIIMS का क्या हुआ।

मिथिला स्टुडेंट यूनियन से जुड़े गोपाल चौधरी कहते हैं, ‘10 साल से निर्माणाधीन दरभंगा एम्स का अभी तक गेट भी नहीं बना है। ना बिजली का तार हटा ना 4 लेन सड़क और बिल्डिंग का निर्माण हुआ है। प्रवेश द्वार बन रहा है। बाउंड्री मुश्किल से 50 फीट बन पाई है। इस बार भी बाढ़ का पानी आ गया था,जिस कारण काम अवरुद्ध है।‘
वहीं दरभंगा शहर के घनश्याम महतो कहते हैं, ‘राजकोट एम्स 1195 करोड़ रुपये की लागत से बन गया, वहीं दरभंगा एम्स 1261 करोड़ रुपये लागत से अभी बन ही रहा। जबकि दोनों एम्स के निर्माण की घोषणा वर्ष 2020 में की गई थी। एम्स बिलासपुर की आधारशिला भी नरेन्द्र मोदी ने 3 अक्टूबर, 2017 को रखी थी। वह भी 2021 में बनकर तैयार हुआ और 2022 में उद्घाटन हो गया। मोदी है, तो मुमकिन है।‘
मधुबनी के रहने वाले सत्यम झा कहते हैं, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2015 में बिहार के दरभंगा जिले में एम्स का प्रस्ताव रखा था । तब से यह विधानसभा का तीसरा चुनाव है। पता नहीं अगले विधानसभा चुनाव तक भी एम्स बन पाएगा या नहीं? दरभंगा एम्स न हुआ बीरबल का खिचड़ी हो गया। बन ही नहीं रहा है।‘
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान वर्ष 2015 में बजट पेश करते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बिहार के दरभंगा में प्रदेश के दूसरे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बनाने का ऐलान किया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 सितंबर, 2020 को 1264 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले दरभंगा एम्स को मंजूरी दी एवं 13 नवंबर 2024 को दरभंगा आकर शिलान्यास और भूमि पूजन किया था।
उस वक्त मिथिलांचल के लोगों की उम्मीद जगी थी कि जल्द ही इस अस्पताल के निर्माण कार्य की शुरुआत होगी और यहां के लोगों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। लेकिन 10 साल के बाद भी अभी तक अस्पताल की बाउंड्री भी पूरी नहीं हुई है।
दरभंगा के रहने वाले आलोक कुमार पटना में रहकर पढ़ाई करते हैं। वह बताते हैं कि दरभंगा शहर का इतिहास काफी समृद्ध है। वहां एक अस्पताल डीएमसीएच है, जिसे दरभंगा महाराज ने ही जमीन दान में दे कर बनवाया था। जो कुछ अच्छा है दरभंगा महाराज का दिया हुआ है। सरकार सिर्फ आश्वासन देती है। मोदी जी तो भाषण में एम्स बनवा भी चुके हैं।
अगस्त 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए असम के गुवाहाटी से लेकर पश्चिम बंगाल के कल्याणी तक, झारखंड के देवघर से लेकर बिहार में दरभंगा तक इस प्लानिंग के साथ नए-नए एम्स खोले गए हैं, ताकि लोगों को इलाज के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर न जाना पड़े।
क्यों देरी से शुरू हुआ निर्माण कार्य?
वरिष्ठ पत्रकार राजेश ठाकुर के मुताबिक दरभंगा में एम्स कहां बनेगा, इसे लेकर सभी राजनीतिक दलों ने खूब राजनीति की थी। मिथिला स्टूडेंट यूनियन से जुड़े अमित कुमार बताते हैं कि केंद्र सरकार ने तब बिहार सरकार पर आरोप लगाया था कि सही जमीन नहीं मिली है। वहीं बिहार सरकार का कहना था कि जमीन देने के बाद भी केंद्र सरकार राजनीतिक मंशा से जानबूझकर निर्माण कार्य शुरू नहीं कर रहीं। उस वक्त नीतीश कुमार तेजस्वी यादव के साथ थे।
जहां एम्स बन रहा है, वह जगह दरभंगा शहर से करीब पांच किलोमीटर और दरभंगा के हवाई अड्डे से करीब आठ किलोमीटर दूर शोभन-भरौल बाईपास पर मौजूद है। यह जमीन बलिया मौजा के अंतर्गत आती है। यहां की जमीन सड़क से काफ़ी नीचे की तरफ है और बारिश की वजह से जमीन का ज्यादातर हिस्सा पानी में डूबा हुआ है।
एजेंसी को इस काम का मिल गया टेंडर
प्रधानमंत्री मोदी की मधुबनी में प्रस्तावित रैली से एक दिन पहले अप्रैल 2025 में दरभंगा एम्स के निर्माण कार्य की आधिकारिक शुरुआत हुई। प्रथम चरण में भूमि की चारदीवारी बनाई जा रही है, जिसके पूरा होते ही भवन निर्माण की प्रक्रिया भी आरंभ हो जाएगी। इन कार्यों पर करीब 51.76 करोड़ रुपए की लागत आएगी। सभी कार्य 12 महीने में पूरे करने का लक्ष्य है।
एम्स के लिए चिन्हित की गई जमीन का सीमांकन पूरा हो चुका है और बाउंड्री बनाने के लिए टेंडर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की एजेंसी एचएससीसी इंडिया लिमिटेड एजेंसी को मिल चुका है। एचएससीसी इंडिया लिमिटेड एजेंसी के महाप्रबंधक सुभाष शर्मा ने मीडिया कांफ्रेंस के दौरान बताया कि, जून में ही बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। दरभंगा एम्स के मुख्य भवन के निर्माण संबंधित डीपीआर तैयार की जा रही है। इसका डीपीआर IIT दिल्ली तैयार कर रहा है।
इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 1261 करोड़ रुपये है। यह प्रोजेक्ट करीब 188 एकड़ भूमि पर फैला होगा और इसमें 2.25 लाख वर्ग मीटर से अधिक का निर्माण क्षेत्र शामिल होगा। एम्स दरभंगा को अगले 36 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य है।
एम्स परिसर को बाढ़ और जलजमाव से बचाने के लिए चारों ओर रिंग बांध बनाने की भी योजना है।
परिसर से जल निकासी के लिए नाली निर्माण भी प्रस्तावित है। एचएससीसी से इस पर तकनीकी राय ली जाएगी। मिट्टी भराई के लिए राज्य सरकार ने 309.29 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। वहीं दरभंगा में एम्स के लिए आवंटित जमीन के ऊपर से 400 केवी की दरभंगा-सीतामढ़ी संचरण लाइन गुजर रही है। अधिकारियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस हटाने का कार्यवाही होगी। इस कार्य पर करीब 11.67 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
मिथिला क्षेत्र में अस्पताल बद से बदतर
दरभंगा के स्थानीय नितेश झा कहते कि, ‘दरभंगा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल DMCH की स्थिति भी बदहाल है। नर्क इस अस्पताल से बढ़िया होगा। गंदगी, लाचार मरीज और डॉक्टरों की भारी कमी के साथ-साथ दवाओं की कमी आपको इस इलाके के अमूमन सभी अस्पतालों में देखने को मिल जाएगी।‘
भारत सरकार की नेशनल हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर की 2023-24 रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के 62% मरीज राज्य के बाहर इलाज कराते हैं, जो सभी भारतीय राज्यों में सबसे अधिक है। ज़रा सी भी इमरजेंसी हो जिला सदर अस्पताल में सुविधाएं न होने के कारण IGIMS/AIIMS/PMCH पटना रेफर कर दिया जाता है जहाँ बेड मिलना भगवान मिलने से ज्यादा कठिन है।
दरभंगा एम्स का मुद्दा अब मिथिलांचल सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों, खासकर सहरसा, सुपौल, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा, खगड़िया, अररिया, किशनगंज और आसपास के इलाकों के लोगों की भावनाओं का विषय बन गया है। इस एम्स के बन जाने से उत्तर बिहार के 8.30 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। नेपाल के 14 जिलों, सिक्किम और बंगाल के 5 जिलों के मरीजों को भी इलाज की सुविधा मिलेगी।
दरभंगा एम्स का मामला लंबे समय से लेटलतीफी का शिकार रहा है, लेकिन अब सरकार की सक्रियता और प्रशासनिक तत्परता से निर्माण कार्य में तेजी आई है। पता नहीं वर्षों से प्रतीक्षित इस परियोजना को धरातल पर कब उतारा जाएगा।

