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लेंस रिपोर्ट

बिहार चुनाव: महिलाओं की भागीदारी और चुनाव आयोग पर उठे सवाल

राहुल कुमार गौरव
राहुल कुमार गौरव
Byराहुल कुमार गौरव
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Published: November 10, 2025 5:28 PM
Last updated: November 10, 2025 5:28 PM
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बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान हो चुका है और अब दूसरे चरण का मतदान होना है। चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में राज्य के 18 जिलों की 121 विधानसभा क्षेत्रों में हुए मतदान में कुल मतदाताओं की संख्या 3.75 करोड़ से अधिक है। आजादी के बाद पहली बार 65.08% मतदान के साथ नया रिकॉर्ड बन गया है। 

खबर में खास
महिलाएं अगर ज्यादा संख्या में वोट दे रही हैं तो…मुस्लिम महिलाओं का बिहार की राजनीति में प्रतिनिधित्व कमअसली मुकाबला दूसरे चरण में 

पहले चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में बताया था कि बिहार में पहले चरण में अब तक का सबसे अधिक 64.66% वोटर टर्नआउट रहा। बाद में यह आंकड़ा बढ़ गया। इन रिकॉर्ड में भी सबसे खास बात यह रही कि महिलाओं ने पुरुषों से 8% अधिक मतदान कर नई लोकतंत्र की तस्वीर पेश की।

पटना में चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुताबिक महिलाओं ने 69.04% मतदान किया, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 61.56% रहा। हालांकि नए आंकड़े में महिला एवं पुरुष का प्रतिशत मतदान नहीं बताया गया है। इस विषय पर तेजस्वी यादव ने भी सवाल उठाया है।

तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सवाल उठाया कि 4 दिन हो गए हैं, पहले चरण के मतदान के आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं कि कितने पुरुष और महिलाओं ने मतदान किया। बिहार में कई जगह स्ट्रॉन्ग रूम में CCTV बंद क्यों पड़े हैं? चुनाव आयोग को इस मामले को गंभीरता से लेकर जवाब देना चाहिए। VVPAT की पर्चियां कूड़े की तरह फेंकी गईं, ऐसा कैसे हुआ? BJP पाप कर रही है और चुनाव आयेाग उन्हें छिपाने का काम कर रहा है।

चुनाव आयोग द्वारा जारी पहले के आंकड़े को देखा जाए तो 2020 विधानसभा चुनाव में महिलाओं की वोटिंग दर 59.69% थी, यानी 2020 विधानसभा चुनाव में  लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। यह वृद्धि केवल आंकड़ा नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण का प्रमाण है कि अब बिहार की महिलाएं घर की चारदीवारी से निकलकर लोकतंत्र की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 2010 से अब तक महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि देखी गई है। 2010 में जहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत 54.85% था, वहीं 2015 में यह 59.69% और 2025 में बढ़कर 69.04% हो गया। यानी नीतीश कुमार के राज्य में महिलाओं का मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ता रहा है।

चुनावी पीआर एजेंसी में काम कर रहें आशीष बताते हैं कि, “इस चुनाव में महिलाओं की सक्रियता खास तौर पर देखने को मिल रही है। सिर्फ मतदाता के रूप में नहीं बल्कि प्रचारक के रूप में भी महिलाएं पूरी तरह आगे हैं। सभी प्रमुख पार्टियां भाजपा, कांग्रेस, जदयू और जनसुराज या अन्य दल ने अपने प्रचार में महिलाओं को अहम जिम्मेदारी दी है।”

महिलाएं अगर ज्यादा संख्या में वोट दे रही हैं तो…

पेशे से शिक्षिका और लेखिका स्वाति कुमारी बताती हैं कि, “यह सच है कि नीतीश कुमार महिलाओं को एक नए वोट बैंक के तौर पर स्थापित किए हैं। चुनाव से पहले भी महिलाओं को लेकर कई योजना की शुरुआत की गई। जीविका नीतीश कुमार का मुख्य वोट बैंक है। लेकिन इस बार के चुनाव में रोजगार और पलायन मुख्य मुद्दा है। सालों से चली आ रही सरकार से लोग खफा हैं। पुरुष मतदाता की तरह महिला मतदाता जाति पर वोट नहीं देती हैं। महिलाएं अगर ज्यादा संख्या में वोट दे रही हैं तो इसका मतलब है कि महिलाएं अपनी बात आगे रख रही हैं।”

वहीं सुपौल की रहने वाली हसमूख देवी जीविका से जुड़ी हुई है, वह बताती हैं कि, “गांव में आज भी अधिकांश महिलाएं पुरुष के कहने पर वोट देती है। हालांकि यह बात सच है कि नीतीश कुमार ने जीविका एवं अन्य योजना के माध्यम से महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया है।”

गौरतलब है कि हर बूथ पर महिलाओं को पहुंचाने के लिए जीविका के कैडर का इस्तेमाल किया गया। ऐसे में यह कहना ग़लत नहीं होगा कि अगर इस बार नीतीश कुमार महिलाओं की वजह से चुनाव जीते तो राजनीति एक नए तरह का वोट बैंक निर्णायक रूप से स्थापित हो जाएगा।

मतदान प्रतिशत को सभी दल के नेता अपनी-अपनी जीत बता रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी रैली में कहा कि पहले चरण के मतदान के बाद विपक्षी पार्टी के चुनावी प्रचार का गुब्बारा पूरी तरह फूट गया है।

वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी और अमित शाह पर ‘चुनाव चोरी’ का आरोप लगाते हुए कहा कि, “नरेंद्र मोदी, अमित शाह और इलेक्शन कमिशन ने हरियाणा का चुनाव चोरी किया है। लोकसभा में इन्होंने चोरी की, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में इन्होंने चोरी की। अब इनकी कोशिश है कि बिहार का चुनाव चोरी किया जाए।”

मुस्लिम महिलाओं का बिहार की राजनीति में प्रतिनिधित्व कम

बिहार में मुस्लिम कुल आबादी के करीब 18 फीसदी है, लेकिन राजनीति में उनकी हिस्सेदारी बेहद सीमित है।‌ इसमें भी मुस्लिम महिलाओं की बात करें तो पूरे चुनाव में सभी प्रमुख पार्टियों ने मिलकर सिर्फ 79 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। उनमें से केवल दो महिलाएं हैं। पहली सीमांचल क्षेत्र की अररिया विधानसभा सीट से शगुफ्ता अजीम, जिन्हें जदयू ने उम्मीदवार बनाया है वहीं दूसरी महिला उम्मीदवार राजद की इशरत परवीन, जिसे, कटिहार जिले की प्राणपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में खड़ा किया गया है। 

हिंदू और मुस्लिम महिलाओं की बात करें तो प्रमुख पार्टियों ने कुल मिला कर 88 महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। जन सुराज ने 25, राजद ने 23, भाजपा और जदयू ने 13-13, लोजपा (राम विलास) ने 6, कांग्रेस ने 5, जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ने 2, मुकेश सहनी की वीआईपी ने 1 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया। 

इसमें भी सबसे ताज्जुब बात यह हैं कि चुनाव के पहले 40 प्रतिशत महिला प्रत्याशी उतारने का दावा करने वाली जन सुराज ने महज 25 महिलाओं यानी 10 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया। इनमें से में एक भी मुस्लिम महिला नहीं है। रशीद किदवई और अंबर कुमार घोष की आगामी पुस्तक मिसिंग फ्रॉम द हाउस- मुस्लिम वीमेन इन द लोकसभा के मुताबिक लोकसभा में मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम रहा है। आजादी के बाद से 18 लोकसभाओं में केवल 18 मुस्लिम महिलाएं ही सदन में पहुंची हैं जिनमें से 13 राजनीतिक परिवारों से हैं।

असली मुकाबला दूसरे चरण में 

बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को मतदान होगा, जिसके लिए चुनाव आयोग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। जबकि मतगणना 14 नवंबर को निर्धारित है। पूरे बिहार में घूम कर ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहें विमलेंदु सिंह बताते हैं कि, ,”पहले चरण में हुए चुनाव में कहना मुश्किल है कि कौन जीत रहा है,कौन हार रहा है। काफी कशमकश मुकाबला रहा है। पहले चरण के चुनाव में, आजादी के बाद सर्वाधिक 65 प्रतिशत से अधिक वोटिंग को देखते हुए दूसरे चरण में भी रिकॉर्ड मतदान होने की उम्मीद है।”

साल 2020 में दूसरे चरण की 20 जिलों में से 7 जिले ऐसे हैं जहां पर एनडीए के किसी भी पार्टी के प्रत्याशी का खाता नहीं खुला था। यानी 7 जिलों में एनडीए का सूपड़ा साफ हो गया था। हालांकि दूसरे चरण के दो जिले ऐसे भी हैं जहां महागठबंधन का भी खाता नहीं खुला था। जिसे देखते हुए कहा जा सकता है कि असली चुनौती तो अब शुरू हो रही है।

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