[
The Lens
  • होम
  • लेंस रिपोर्ट
  • देश
  • दुनिया
  • छत्तीसगढ़
  • बिहार
  • आंदोलन की खबर
  • सरोकार
  • लेंस संपादकीय
    • Hindi
    • English
  • वीडियो
  • More
    • खेल
    • अन्‍य राज्‍य
    • धर्म
    • अर्थ
    • Podcast
Latest News
Delhi Air Pollution: मेसी के कार्यक्रम में दर्शकों ने लगाए AQI-AQI के नारे, CM रेखा स्‍टेडियम में थीं मौजूद
शिवराज न तो नड्डा हैं न नबीन…!
राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रहे पूर्व सांसद डॉ. रामविलास वेदांती का निधन
पंकज चौधरी को यूपी भाजपा का अध्यक्ष बनाने के पीछे कौन सी राजनीति है?
अब VB-G RAM G के नाम से जानी जाएगी MGNREGA, सांसदों को बांटी गई बिल की कॉपी
तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगी और हत्याएं: डॉ. दिनेश मिश्र
नितिन नबीन: छत्तीसगढ़ की जीत से लेकर वंशवाद और आरएसएस की पसंद के सवाल तक
संगीता बरूआ बनीं प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की पहली महिला अध्यक्ष
DSP कल्पना वर्मा–दीपक टंडन केस : आरोप लगाने वाले दीपक टंडन के अतीत पर उठे गंभीर सवाल, फर्जीवाड़े से लेकर घोटालों के नेटवर्क तक चर्चा
छत्तीसगढ़ आईपीएस प्रखर पांडेय का हृदयघात से आकस्मिक निधन
Font ResizerAa
The LensThe Lens
  • लेंस रिपोर्ट
  • देश
  • दुनिया
  • छत्तीसगढ़
  • बिहार
  • आंदोलन की खबर
  • सरोकार
  • लेंस संपादकीय
  • वीडियो
Search
  • होम
  • लेंस रिपोर्ट
  • देश
  • दुनिया
  • छत्तीसगढ़
  • बिहार
  • आंदोलन की खबर
  • सरोकार
  • लेंस संपादकीय
    • Hindi
    • English
  • वीडियो
  • More
    • खेल
    • अन्‍य राज्‍य
    • धर्म
    • अर्थ
    • Podcast
Follow US
© 2025 Rushvi Media LLP. All Rights Reserved.
सरोकार

बैंकों के मेगा मर्जर की योजना से क्या होगा? जरूरी है विजय माल्या, नीरव मोदी जैसों पर लगाम !

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी
डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी
Byडॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी
Follow:
Published: October 18, 2025 7:40 PM
Last updated: October 18, 2025 7:44 PM
Share
banks merger
SHARE

भारतीय सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मर्जर करने जा रही है। चार छोटे सरकारी बैंकों—इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र को बड़े बैंकों जैसे पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ विलय करने का प्रस्ताव है।

सरकार का कहना है कि  यह योजना क्रेडिट विस्तार को बढ़ावा देने, वित्तीय क्षेत्र में सुधार लाने और कमजोर बैंकों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों  की संख्या और कम हो जाएगी और फिजूल की प्रतिस्पर्धा पर रोक लगेगी।

जब दो बैंक अपनी संपत्ति और देनदारियों को मिलाकर एक बैंक बन जाते हैं, तो एक विशेष स्थिति को बैंकों का मर्जर कहा जाता है। मर्जर से बैंकिंग सेक्टर में अस्थायी राहत हो सकती है, लेकिन यह समस्या का वास्तविक उपाय नहीं है । सरकार ने 2019 में दस सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को चार संस्थाओं में विभाजित करने की घोषणा की।

यह मूल रूप से उधार देने की लागत को कम करने के लिए है। मर्जर  के अपने फायदे और नुकसान हो सकते हैं। यह संचालन की लागत को कम करता है। एनपीए और जोखिम प्रबंधन को लाभ होता है। यह एक बड़ा पूंजी आधार और उच्च तरलता देखता है जो पुनर्पूंजीकरण के बोझ को कम करता है।

विलय वित्तीय समावेशन और बैंकिंग परिचालन की भौगोलिक पहुंच को व्यापक बनाने में भी मदद कर सकता है। कुछ बैंकों के पास क्षेत्रीय ग्राहक होते हैं जिनकी उन्हें सेवा करनी होती है और विलय विकेंद्रीकरण के विचार को नष्ट कर देता है।

सरकार पहले भी ऐसी ही योजना पर  2017 से 2020 तक काम कर चुकी है।  जिसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र की यानी सरकारी बैंकों की संख्या  27 से घटकर 12 हो चुकी है। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर में  निजी बैंकों को आर्थिक नियोजन, ग्रामीण उन्नयन और कॉर्पोरेट एकाधिकार रोकने के लिए सरकारी नियंत्रण में लाया गया।

बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट  1949 के तहत 1969 और 1980 में चरणबद्ध काम किया गया। इससे सरकारी क्षेत्र के बैंकों की संख्या बढ़ी और बैंकिंग गाँव गाँव तक पहुंची।  लेकिन अब  जो मर्जर प्रस्तावित है वह  नीति आयोग  की सिफारिशों से अलग दिशा में है।  नीति आयोग ने  तो  छोटे बैंकों के निजीकरण का सुझाव दिया गया था।  लेकिन कैबिनेट  ने मर्जर की योजना बनाई और उसी स्तर पर चर्चा चल रही है।

बैंक  मर्जर से रोजगार पर प्रभाव पड़ता है।  सरकार  तो हमेशा ही कहती है  कि हमेशा ‘कोई छंटनी नहीं’ होगी। । फिर भी, व्यावहारिक रूप से कुछ नौकरियां प्रभावित होती हैं। मर्जर से शाखाओं का तर्कसंगतकरण (रेशनलाइजेशन) होता है, जहां ओवरलैपिंग ब्रांच बंद हो जाती हैं। इससे अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत कम पड़ती है। 2017-2020 के मर्जर (जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहयोगी बैंकों का विलय) में लगभग  10,000  से 15,000 नौकरियां अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुईं।  

हजारों बैंक कर्मियों ने  वीआरएस यानी  स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना  के तहत काम छोड़ दिया। नए मर्जर में भी इसी पैटर्न की उम्मीद है, जहां 20,000 से 30,000 कर्मचारी वीआरएस चुन सकते हैं, लेकिन प्रत्यक्ष छंटनी शून्य रहेगी। कुल मिलाकर, नौकरियां नहीं घटेंगी, बल्कि रीडिप्लॉयमेंट और रिस्किलिंग पर फोकस होगा। बैंक के कर्मचारियों को प्रमोशन में मुश्किल हो सकती है। कर्मचारियों के वीआरएस   के कारण  काम का बोझ भी बढ़ेगा।

इस तरह के मर्जर में खाताधारकों को परेशानी होती ही है। ग्रामीण/क्षेत्रीय ब्रांच बंद होने से दूरदराज के ग्राहकों को परेशानी। प्रतिस्पर्धा कम होने से फीस बढ़ सकती है। अकाउंट नंबर, IFSC कोड या कार्ड बदलने पड़ सकते हैं। कुछ समय के लिए सर्विस डिसरप्शन (जैसे चेकबुक डिलीवरी में देरी) हो सकता है।

पुराने बैंक से लगाव टूट सकता है, खासकर रीजनल बैंकों के ग्राहकों में। 2017 में जब स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया दुनिया का 47वां सबसे बड़ा बैंक बना तो उसका एनपीए घटा, लेकिन शुरुआत में आईटी इंटीग्रेशन में चुनौतियां थीं। जब भी बैंकों के मर्जर हुए तब  शुरुआती 2-3 साल में लाभप्रदता घटी। पंजाब नेशनल बैंक तो नुकसान में पहुँच गया था। मर्जर से कर्मचारियों में काम का तनाव बढ़ा। ग्रामीण पहुंच में थोड़ी कमी।

सरकार के अनुसार, इस पहल के तीन मुख्य उद्देश्य हैं। बड़े और मजबूत बैंक बनाना,  जिनकी बैलेंस शीट मजबूत हो। ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाना और ओवरलैपिंग शाखाओं को कम करना। ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंकों की श्रेणी में भारतीय पीएसयू बैंकों को खड़ा करना। साथ ही, डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक के तेजी से विस्तार के बीच, सरकार चाहती है कि पब्लिक सेक्टर बैंक ‘ रणनीतिक रूप से पोजिशन’ हों, न कि बहुत बिखरे हुए।

सरकार का कहना है कि मर्जर  के कारण बैंक का आकार और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है, जिससे देश की बैंकिंग प्रणाली मजबूत होती है। बड़े सरकारी बैंकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलती है और उनकी ऋण देने की क्षमता बढ़ती है।ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल ऐप और एटीएम जैसी बेहतर सुविधाएँ मिलती हैं। बैंकों का संचालन सरल और मजबूत बनता है, और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलता है। मर्जर से परिचालन की कास्ट कम होती है। बचत होती है और जमा पर खर्च कम होता है।

बैंकों का मर्जर कई बार जरूरी होता है। इसी से बैंक अपना कारोबार फैला सकते हैं।   बैंकों की एफिशियंसी  देश की इकोनॉमी के लिए भी जरूरी है।  लेकिन  एनपीए की समस्या छोटे बैंकों के कारण नहीं, बल्कि एनपीए से निपटने की अकुशल नीतियों के कारण बढ़ रही है।  

भारत में बैंकिंग घोटालों के कई हाई-प्रोफाइल मामले हैं, जहां प्रमुख उद्योगपति या व्यवसायी बैंकों से कर्जा  लेकर विदेश भाग गए। ये लोग ‘विलफुल डिफॉल्टर्स’ के रूप में वर्गीकृत हैं, जिन्होंने बैंकों को अरबों रुपये का नुकसान पहुंचाया। ये घोटाले  नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स  को बढ़ाते हैं, जो बैंकों की बैलेंस शीट को कमजोर करते हैं।

2015-2025 के बीच, लगभग 38-50 ऐसे प्रमुख व्यक्ति/कंपनियां विदेश भाग चुकी हैं, जिनका कुल डिफॉल्ट 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है।  अगर ऐसे चोट्टों  पर लगाम नहीं कसी गई तो बैंकों के मर्जर से ही तो बैंक मुनाफे में नहीं आएगी।

  • लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं

इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं और जरूरी नहीं कि वे Thelens.in के संपादकीय नजरिए से मेल खाते हों।

TAGGED:banks mergerNIRAV MODITop_NewsVijay Mallya
Previous Article fire at Dhaka International Airport ढाका इंटरनेशनल एयरपोर्ट में भीषण आग, सभी उड़ाने कैंसिल
Next Article India Afghanistan Relations काबुलीवाला आया: नहीं आयी काबुलीवाली
Ad Exhibition Lens

Popular Posts

असम में पावर प्रोजेक्‍ट के लिए 14 सौ परिवार जमीन से बेदखल, ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन तेज

द लेंस डेस्‍क। असम के धुबरी जिले में प्रस्तावित थर्मल पावर परियोजना को लेकर विरोध…

By Lens News Network

मानसून सत्र हंगामेदार, लेकिन इस मामले पर पक्ष-विपक्ष एकजुट  

नई दिल्‍ली। संसद का मानसून सत्र आज भले ही हंगामेदार रहा हो। कई मुदों पर…

By अरुण पांडेय

मीडिया उतना ही स्वतंत्र जितना जनतंत्र

हिंदी के मशहूर व्यंगकार हरिशंकर परसाई ने कहा था, ‘दिवस कमजोर का मनाया जाता है,…

By Editorial Board

You Might Also Like

Chaitanyananda Saraswati arrested
देश

आगरा के होटल से दबोचा गया ‘डर्टी बाबा’ चैतन्यानंद सरस्वती, 17 छात्राओं के यौन शोषण का आरोपी

By Lens News
SSC
आंदोलन की खबर

SSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ अभ्यर्थियों का रामलीला मैदान में जोरदार प्रदर्शन, 44 गिरफ्तार

By आवेश तिवारी
DK Shivakumar
अन्‍य राज्‍य

डीके शिवकुमार ने गाया ‘नमस्ते सदा वत्सले’, जानिए फिर क्‍या हुआ? देखिए वीडियो

By अरुण पांडेय
सरोकार

गणेश शंकर विद्यार्थी:  सामाजिक सुधारों की मुखर आवाज

By Editorial Board

© 2025 Rushvi Media LLP. 

Facebook X-twitter Youtube Instagram

kofbola resmi

kofbola resmi

kofbola

link daftar bola

sabung ayam online

kyndrasteinmann.com

judi bola parlay

agen parlay

kofbola

situs toto

sbet11

toto sbet11

www.miniature-painting.net

link kofbola

daftar link kofbola

link kof bola

okohub.com

sbet11

kofbola parlay

situs bola parlay

https://p2k.itbu.ac.id/

https://www.dsultra.com/

https://stimyapim.ac.id/

  • The Lens.in के बारे में
  • The Lens.in से संपर्क करें
  • Support Us
Lens White Logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?