एक रिहाई। एक धमाका। एक पत्रकार।
31 दिसंबर 1999
शाम को काठमांडू से नई दिल्ली के लिए इंडियन एयरलाइन्स की फ्लाइट आईसी 814 ने अपने निर्धारित समय से उड़ान भरी। ये दिन था शुक्रवार का। फ्लाइट कप्तान ‘देवी शरण’ को मिलाकर विमान में कुछ 190 लोग सवार थे। कोई पंद्रह मिनट बाद पता चला कि इनमें 185 ही आम नागरिक हैं। बाकी बचे पांच लोग, अब कॉकपिट में बन्दूक और हैंड ग्रेनेड के साथ देवी शरण को निर्देशित कर रहे थे कि क्या करना है।
उनके निर्देशानुसार हवा में लहराते हुए विमान संख्या 814 ने शाम 4:56 (IST) को भारतीय उड्डयन विभाग को सूचित किया। विमान हाईजैक हो चुका था। वह पांच नकाबपोश हरकत-उल-मुजाहिदीन के प्रतिनिधि थे।
तत्कालीन प्रधानमन्त्री वाजपेयी विदेश दौरे पर थे। देर शाम उन्हें सूचना मिली। गृह मंत्री आडवाणी आंतकियों से बात करने से इंकार कर चुके थे, और जसवंत सिंह उन्हें लगातार मनाते रहे कि आतंकियों से बातचीत किये बगैर कोई रास्ता नहीं है। जब पूरा कैबिनेट अपने अंतरराष्ट्रीय संपर्क खंगाल रहा था, तो अमरीका ने एक दुर्लभ सलाह दी- ‘भारत को अपने आंतरिक मामले खुद ही सुलझाना चाहिए। तालिबान से वह अकेले बात करे। अमरीका आतंकवाद की कड़ी निंदा करता है।’
विमान चंडीगढ़, लाहौर और दुबई से होते हुए कंदहार एयरपोर्ट पहुंचा। दुबई से 27 जीवित और एक मृत यात्री भारत को मिले। बाकी अब भी विमान में कैद थे।
वाशरूम मानव मल और पेशाब से भर गया, जो बहकर जहाज़ की कालीन में सूख रहा था। उसकी गंध सांस में थी। सभी यात्रियों की आँखों में पट्टियां बंधी थी। आतंकियों ने आदमी, औरत और बच्चों को अलग किया; खाने की चीज़ें वापस ले लिए गए।

एक हफ़्ते के भारत सरकार से “निगोशिएट” करने के बाद 30 आतंकियों में से 3 को भारतीय जेल से छुड़ाने की मांग स्वीकार की गयी। ये 3 नाम थे ‘मसूद अज़हर’, ‘ओमर सईद’ और ‘मुश्ताक़ अहमद’। इन्हें आगे चलकर भारतीय संसद पर हमला, पहलगाम और पुलवामा आतंकी हमलों को अंजाम देना था। और हां! सितंबर 2001 में अमरीका में धमाका भी।
मगर अमरीका, आंतकवाद और उसमें लिप्त देशों की कड़ी निंदा करता है।
तीनों आंतकी 31 दिसंबर को रिहा होकर कंदहार हवाई अड्डे उतरे। भारतीय विमान संख्या 814 ने विपरीत दिशा में उड़ान भरी। तालिबान के आकाश से उड़कर वह दिल्ली पहुंचा। रुबिन कत्याल नामक भारतीय यात्री मारा जा चुका था। नए साल वह अपने घर में नहीं था।
23 जनवरी 2002
जनवरी का महीना अगर हिंदुस्तान में सर्दियों का होता है तो पाकिस्तान के कराची शहर में बहुत अलग नहीं होता।
मैरिएन पर्ल कराची की अपनी रसोई में रात के खाने की तैयारी कर रही हैं। आज कुछ दोस्त घर पर आनेवाले हैं, मगर उसे अपने पति डैनिएल का इंतज़ार है। वो एक इंटरव्यू के सिलिसिले में बाहर निकले हैं।
डैनिएल पर्ल अमरीकी पत्रकार हैं और वाल स्ट्रीट जर्नल के दक्षिण एशिया ब्यूरो चीफ भी। यह जोड़ा कुछ ही दिन पहले मुंबई से कराची आकर बसा है। डैनिएल यहां 9/11 आतंकवादी घटनाक्रम में पाकिस्तानी भूमिका जानने आये हैं। आज उनका जैश-ए-मोहम्मद के एक बड़े नेता से इंटरव्यू है। एक फ़िक्सर ने 9 ईमेल के जरिये इसका इंतज़ाम किया है।
मैरिएन थोड़ा परेशान दिखती हैं। मेहमान घर आ चुके हैं मगर डेनियल नहीं। दोस्तों में हशीश का दौर चल रहा है और दूसरी तरफ मैरिएन हर 10 मिनिट में डेनियल को कॉल कर रही हैं। शाम के 7:30 बज चुके हैं।
डैनियल का फोन बंद है। ऐसा कभी… कभी नहीं हुआ।
8:30 बजे तक हालात ऐसे हैं कि मैरिएन मेहमानों को धक्के मारकर घर से बाहर निकाल दे। वह जानती है कि कुछ ठीक नहीं है। मैरिएन इस नाज़ुक हालत में डैनियल के बॉस जॉन बस्सी को ख़बर करती हैं, इस एतिहाद के साथ कि पाकिस्तान पुलिस को इसकी भनक न लगे।
पुलिस किसकी तरफ है ये कोई नहीं जानता। ख़ुद पुलिस भी नहीं।
22 जून 2007
इस रोज एक फिल्म रिलीज हुयी जो ‘ए माइटी हार्ट’ नामक किताब पर आधारित थी। किताब दरअसल मैरिएन पर्ल की जीवनी है जो उनके और डैनियल के पकिस्तान के अनुभवों को उजागर करती है। इसमें एंजेलिना जोली, इरफान खान और आर्ची पंजाबी प्रमुख भूमिकाओं में थे।
फिल्म में एंजेलिना (मैरिएन पर्ल की भूमिका में) डैनियल का इंतजार कर रही है। उनका घर कराची पुलिस की छावनी बनी हुई है। इंटेलीजेंस ब्यूरो से लेकर पूरा पाकिस्तानी कुनबा डैनियल की तलाश कर रहा है। मैरिएन इस बात पर अड़ी है कि आतंकवादी की तरफ से कोई भी सम्पर्क मेल या फोन द्वारा डैनियल के कंप्यूटर पर ही होगा।
अचानक 27 फरवरी को मैरिएन के ड्राइंग रूम में बैठी साथी पत्रकार असरा नोमानी को एक कॉल आता है। असरा केवल अंग्रेज़ी बोलती है। फ़ोन कट जाता है।
फिर आता है एक ईमेल तस्वीर के साथ।
यह एक लंबा मेल है जिसमें डैनियल पर्ल की पहली फोटो जारी की गई है। फोटो में उनके हाथ लोहे के चेन से बंधे हैं और उनके कनपटी पर एक व्यक्ति ने बंदूक तान रखी है। यह साफ है कि वो जैश-ए-मोहम्मद के कब्जे में है।
उस मेल में अमरीकी सरकार से डैनियल की रिहाई के एवज में पाकिस्तान के लिए हथियार और हवाई जेट मांगे गए हैं। और भी कई मांगे है, जो मैरिएन को बेसिर पैर के लगते हैं। अमरीकी सरकार को यह सब बेसिर पैर लग रहा है। अमरीकी रक्षा सचिव ‘कॉलिन पॉवेल’ किसी विमर्श के लिए तैयार नहीं।
एक पत्रकार को बचाने की इतनी जरूरत नहीं होती।
जनवरी महीने के अंत में आतंकियों की ओर से एक और ई मेल आता है जिसमें अगले 24 चौबीस घंटों में डैनियल की हत्या करने का दावा किया जाता है।

अगले दो हफ़्ते सब खामोश। कराची और बहावलपुर के कई इलाके और ‘आतंकवादी सेल्स’ में दबिश की जा रही है, मगर कोई सुराग हाथ नहीं लगा। डैनियल के बॉस जॉन बस्सी जो कराची में उनके घर पर ही रुके हैं, बड़े दिनों बाद 5 मिनिट के लिए बाहर निकलते हैं।
मैरिएन चार महीने की गर्भवती है, और सोफे पर बैठी हुई हैं। जॉन और वहां ठहरे सभी लोग अचानक रो रहे हैं। कोई मैरिएन को दूसरे कमरे में ले जाकर कहता है कि डैनियल अब नहीं लौटेंगे।
मैरिएन यकीन नहीं करती। ‘क्या बकवास है! तुम्हें कैसे पता?’ वो भावनाशून्य होकर पूछती है। ‘एक वीडियो जारी किया है आतंकवादियों ने।’
उसमें दिखाई देता है कि डैनिएल अपने यहूदी होने की पुष्टि करते हैं और अमरीकी सरकार के विदेश नीति की आलोचना। इसके बाद उनके पीछे खड़ा एक व्यक्ति डैनिएल के गले की नस काट देता है। फिर उनका सिर कलम कर, बाकी शरीर के टुकड़े किए जा रहे हैं। यह सब 3 मिनट और 36 सेकंड्स में हो रहा है।
कमरे में बैठे सभी ने उस वीडियो को देखा। अमेरिकी राष्ट्रपति ‘जॉर्ज डब्ल्यू बुश’ ने भी। सिर्फ़ मैरिएन उस वीडियो को नहीं देखती, इस यकीन के साथ की एक दिन जब गर्भ में पल रहा बेटा जन्म लेगा, तो इंटरनेट से उस वीडियो को हटाने हेतु मैरिएन के पास कोई विकल्प नहीं होगा।
16 मई 2002
1999 में कंदहार हवाई अड्डे पर जिस आतंकवादी ओमर शेख को आजाद किया गया था, उसी ने डैनिएल के किडनेपिंग और हत्या की साज़िश रची। 16 मई 2002 को कराची के गदाप नामक इलाके में डैनिएल के शव के हिस्से मिले। इसकी शिनाख्त डैनिएल के आखरी पहने हुए जैकेट से हुयी।
डैनिएल का केवल एक ही दोष था- उन्होंने अपनी मौत से पहले पाकिस्तान के बहावलपुर इलाक़े में चल रही आतंकी गतिविधियों को उजागर किया था। ये वही बहलवालपुर है जहां इस वर्ष ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान भारतीय सेना ने आतंकी ठिकानों पर हमले किये थे।

इस हमले में ‘अब्दुल रऊफ’ नामक आतंकी के मारे जाने की बात सामने आयी। असरा नोमानी ने भी अपने ट्वीट में यह जानकारी दी। ‘रौफ’ वही आतंकी है जिसने 1999 में भारतीय विमान को हाईजैक किया था और डैनिएल पर्ल के मौत का मास्टरमाइंड था। ये वही आदमी था जिसने दिसंबर की उस ठण्ड में ओमर शेख को आजाद कराया था।
2013 में ओमर शेख ने पाकिस्तानी कोर्ट में डैनिएल के अगवा और हत्या करने की बात स्वीकारी थी। बाद में 2021 को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों के अभाव में ओमर को रिहा कर दिया। सईद मियां आज फिर से ‘व्यस्त’ हैं।
8 मई 2025

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर डैनियल के पिता एक यहूदी शांति गीत गाते देखे गए। वे बहावलपुर पर भारतीय कार्रवाई से संतुष्ट थे।
मौत के समय डैनिएल 39 वर्ष के थे। जिन्दगी में इस वर्ष वे 62 साल के होते। आज डैनिएल की पत्नी मैरियन और बेटे एडम अमरीका में ‘डैनिएल पर्ल फॉउंडेशन’ के तहत दुनियाभर में अमरीकी पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं।
वहीं अमरीका ने पाकिस्तान को मिसाइल और आर्थिक सहयोग देना जारी रखा है। दक्षिण एशिया में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और शांति की बहाली में अमेरिका हमारी प्रेरणा है।
हैप्पी बर्थडे ‘डैनी’!
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