[
The Lens
  • होम
  • लेंस रिपोर्ट
  • देश
  • दुनिया
  • छत्तीसगढ़
  • बिहार
  • आंदोलन की खबर
  • सरोकार
  • लेंस संपादकीय
    • Hindi
    • English
  • वीडियो
  • More
    • खेल
    • अन्‍य राज्‍य
    • धर्म
    • अर्थ
    • Podcast
Latest News
कफ सीरप तस्करी के आरोपी बाहर, अमिताभ ठाकुर सलाखों में
ऑपरेशन सिंदूर के दाग भूल भारत ने की चीनियों की आवाजाही आसान
AIIMS रायपुर को सिंगापुर में मिला ‘सर्वश्रेष्ठ पोस्टर अवॉर्ड’
डीएसपी पर शादी का झांसा देकर ठगी का आरोप लगाने वाले कारोबारी के खिलाफ जारी हुआ गिरफ्तारी वारंट
11,718 करोड़ की लागत से होगी डिजिटल जनगणना, 1 मार्च 2027 को आधी रात से होगी शुरुआत
तेलंगाना पंचायत चुनाव: कांग्रेस समर्थित उम्‍मीदवारों की भारी जीत, जानें BRS और BJP का क्‍या है हाल?
MNREGA हुई अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’, जानिए कैबिनेट ने किए और क्‍या बदलाव ?
उत्तर भारत में ठंड का कहर, बर्फबारी और शीतलहर जारी, दिल्ली में ठंड और प्रदूषण की दोहरी मार
इंडिगो क्राइसिस के बाद DGCA ने लिया एक्शन, अपने ही चार इंस्पेक्टर्स को किया बर्खास्त,जानिये क्या थी वजह
ट्रैवल कारोबारी ने इंडिगो की मनमानी की धज्जियां उधेड़ी
Font ResizerAa
The LensThe Lens
  • लेंस रिपोर्ट
  • देश
  • दुनिया
  • छत्तीसगढ़
  • बिहार
  • आंदोलन की खबर
  • सरोकार
  • लेंस संपादकीय
  • वीडियो
Search
  • होम
  • लेंस रिपोर्ट
  • देश
  • दुनिया
  • छत्तीसगढ़
  • बिहार
  • आंदोलन की खबर
  • सरोकार
  • लेंस संपादकीय
    • Hindi
    • English
  • वीडियो
  • More
    • खेल
    • अन्‍य राज्‍य
    • धर्म
    • अर्थ
    • Podcast
Follow US
© 2025 Rushvi Media LLP. All Rights Reserved.
लेंस संपादकीय

बसपा सुप्रीमो मायावती की राह

Editorial Board
Editorial Board
Published: October 9, 2025 9:32 PM
Last updated: October 9, 2025 9:33 PM
Share
Mayawati Lucknow rally
SHARE

बहुजन विचारक कांशीराम की पुण्यतिथि के मौके पर लखनऊ में हुई रैली के जरिये बसपा सुप्रीमो मायावती ने जिस तरह से अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश की है, उसमें छिपे संदेशों का साफ पढ़ा जा सकता है। अव्वल तो यही गौर करने वाली बात है कि मायावती ने 2021 की अपनी पिछली रैली के चार साल बाद इस तरह की रैली की है।

दरअसल बीते एक दशक में बसपा का जो क्षरण शुरू हुआ, उसका नतीजा यह है कि बसपा जहां 2022 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में राज्य की 403 में से केवल एक सीट जीत सकी थी, वहीं लोकसभा और राज्यसभा में उसके एक भी सदस्य नहीं हैं! यह उस पार्टी का हाल है, जिसकी सुप्रीमो को कभी प्रधानमंत्री पद की दावेदार की तरह भी देखा जा रहा था।

खुद मायावती ने याद किया है कि 2007 में बसपा ने उत्तर प्रदेश में अपने दम पर बहुमत हासिल किया था, और तब उसके पास राज्य के 30 फीसदी से अधिक वोट थे, जो आज घटकर 12 फीसदी के करीब रह गए हैं। देश के सबसे बड़े सूबे की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती के नेतृत्व में आज बसपा एक-एक सीट के लिए भी संघर्ष करती दिख रही है, तो यह उन्हें सोचने की जरूरत है कि उनकी पार्टी की यह दशा कैसे हो गई?

आखिर क्यों उनका जनाधार कमजोर होता गया और उनकी बहुचर्चित सोशल इंजीनियरिंग कैसे नाकाम हो गई? मायावती ने कहा है कि उनकी पार्टी ने जब-जब गठबंधन किया उसकी हालत कमजोर होती गई है, इसलिए 2027 के विधानसभा चुनाव में वह अपने दम पर अकेले ही चुनाव लड़ेगी।

क्या यह सही नहीं है कि मायावती ने बसपा के भीतर दूसरी लाइन बनने ही नहीं दी, जिसकी वजह से उनके करीबी रहे अनेक लोग या तो सपा के साथ चले गए या भाजपा के। और लखनऊ की इस रैली में भी मायावती ने जिस तरह से अपने भतीजे आनंद को आगे किया है, उससे भी साफ है कि पार्टी में नेतृत्व का कितना अभाव है।

यही नहीं, उन्होंने गुरुवार को लखनऊ में कांशीराम स्मारक के रैली स्थल की मरम्मत करवाने के बहाने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ की है और कांग्रेस तथा सपा पर तीखे हमले किए हैं, उसके अपने राजनीतिक निहितार्थ हैं।

दरअसल बसपा का क्षरण उसकी अपनी विचारधारा से भटकने और उसकी नेता के विचलन का नतीजा भी है। यह उस पार्टी का हाल है, जिसे कांशीराम ने अपनी वैचारिक ऊर्जा और प्रतिबद्धता से खड़ा किया था।

मायावती की चुनौती पहाड़ जैसी है, जहां उन्हें लगभग शून्य से शुरूआत करनी है। सवाल यही है कि क्या वह जमीनी स्तर पर दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों को जोड़ने के लिए उसी तरह की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं, जिसके दम पर बसपा को कांशीराम ने एक बड़ी ताकत बना दिया था।

TAGGED:BSPmayawatiMayawati Lucknow rally
Previous Article Probation of doctors हेल्थ डायरेक्टरेट की यह लिस्ट क्या किसी खास डॉक्टर के लिए निकली है ?
Next Article GST 2.0 नारायणा अस्पताल में पुरानी GST दरों पर ही बेची जा रहीं दवाइयां
Lens poster

Popular Posts

तो क्‍या ट्रंप सरकार का बड़ा सिरदर्द साबित होगा अमेरिका में शटडाउन?

America shutdown : अमेरिका में एक बार फिर राजनीतिक विवाद के चलते सरकारी कामकाज ठप…

By The Lens Desk

विधायकों ने जिंदल में इलाज कराया, मान्यता नहीं थी फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने दी मंजूरी

CG MLAs treatment: छत्तीसगढ़ के दो विधायक एक कांग्रेस से और एक भाजपा से स्वास्थ्य…

By पूनम ऋतु सेन

अमेरिकी प्रतिबंध के दबाव में अडानी ने तेल लदे रूसी जहाज को मुद्रा पोर्ट से वापस भेजा

नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली रूसी तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाज नोबल वॉकर को अपना…

By आवेश तिवारी

You Might Also Like

लेंस संपादकीय

महागठबंधन की जमीन

By Editorial Board
Dalli Rajhara Accident
लेंस संपादकीय

उन्हें मौत नहीं, नींद चाहिए थी!

By Editorial Board
लेंस संपादकीय

त्वरित टिप्पणी  : मानवता पर हमला

By Editorial Board
Hasdeo Forest
लेंस संपादकीय

हसदेव : अडानी के लिए रास्ता साफ करती सरकार

By Editorial Board

© 2025 Rushvi Media LLP. 

Facebook X-twitter Youtube Instagram
  • The Lens.in के बारे में
  • The Lens.in से संपर्क करें
  • Support Us
Lens White Logo
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?